-अब तक 1500 विद्यार्थियों से पैसे लेने का खुलासा ,करीब डेढ़ करोड रुपए के ट्रांजैक्शन -कई अन्य आरोपियों की तलाश में की जा रही है छापेमारी, अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की टीम की कार्रवाई: एक आरोपी को जयपुर, दूसरे को कोटा से पकड़ा, अन्य आरोपियों की तलाश पश्चिम बंगाल व दूसरे राज्यों में जारी

Ahmedabad. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आगामी 21 जून को होने वाली री-नीट यूजी की पुनः परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर अभिभावक एवं विद्यार्थियों को ठगने वाले अंतर राज्यीय गिरोह का अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने पर्दाफाश किया। इस मामले में राजस्थान के जयपुर और कोटा शहर में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जबकि अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में छापेमारी की जा रही है।
अहमदाबाद शहर क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंघल ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि पकड़े गए आरोपियों में मुख्य आरोपी आकाश मीणा है जो मूल रूप से राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रावल गांव का रहने वाला है और फिलहाल कोटा के कुनाडी में रहता है। इसे कोटा से गिरफ्तार किया गया। दूसरे आरोपी सुमेर सिंह मीणा को जयपुर से गिरफ्तार किया गया जो राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की बौली तहसील के पूनेता गांव का रहनेवाला है और अभी जयपुर में जेडीए पार्क के निकट महेशनगर में रहता है।
दोनों आरोपी 21 जून को होने वाली री नीट परीक्षा का पेपर उनके पास होने का फर्जी दावा करते हुए अलग-अलग 8 टेलीग्राम चैनलों पर आइडी बनाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के पास से एडवांस में रुपए वसूल रहे थे। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि अब तक यह 1500 से अधिक विद्यार्थियों , अभिभावकों के पास से 15000 से लेकर 80000 रुपए तक की राशि ऑनलाइन ठग चुके हैं। इनके बैंक खातों में डेढ़ करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन का पता चला है। आरोपी गेमिंग एप और अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराते थे।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी करीब 1 साल से सक्रिय थे। ऐसे में साइबर क्राइम ब्रांच की टीम इस बात की भी जांच करेगी कि इससे पहले लीक हुए नीट के पेपर के मामले में भी इस गिरोह ने अभिभावकों के पास से ठगी की है या नहीं। इस मामले में कई और आरोपियों की भी लिप्तता सामने आ रही है। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी के लिए पश्चिम बंगाल व अन्य जगहों पर छापेमारी की जा रही है। जल्द ही कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी होने की संभावना है। आरोपियों के विरूद्ध साइबर क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 (4) (धोखाधड़ी), 319 (2), 54 तथा आइटी एक्ट की धारा 66 (डी) (साइबर धोखाधड़ी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।