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Amin Sama: कांगो में फंसे भुज के प्रोफेसर डॉ. अमीन समा की वापसी का रास्ता साफ, 18 जून को लौटेंगे भारत

Dr. Amin Sama: गुजरात के भुज के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमीन समा, जो इबोला आशंका के कारण कांगो में फंस गए थे, अब सुरक्षित भारत लौटेंगे। गुजरात सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों के समन्वित प्रयासों से उन्हें ट्रांजिट मंजूरी मिली है। वे 18 जून को स्वदेश पहुंचेंगे।

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Dr Amin Sama professor from Bhuj

Amin Sama: कांगो में फंसे भुज के प्रोफेसर लौटेंगे देश(फोटो-ANI)

Dr. Amin Sama Coming India: गुजरात सरकार और भारतीय राजनयिक मिशनों के संयुक्त और लगातार प्रयासों से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में फंसे भुज के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमीन समा की सुरक्षित स्वदेश वापसी का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें भारत लौटने के लिए जरूरी सभी कानूनी मंजूरियां मिल चुकी हैं और अब वे 18 जून को अपने देश वापस पहुंचेंगे। डॉ. अमीन समा 15 मई को रवांडा की यात्रा पर गए थे। वहां पहुंचने के बाद वे एक मित्र से मिलने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए कांगो के गोमा शहर गए थे। लेकिन इसी दौरान स्थिति अचानक बदल गई। इबोला संक्रमण को लेकर बनी आशंकाओं के कारण रवांडा सरकार ने कांगो से लगी अपनी सीमा को बंद कर दिया। इस फैसले के बाद उनकी वापसी का रास्ता पूरी तरह रुक गया।

जानें डिटेल्स


स्थिति और मुश्किल तब हो गई जब उनकी 31 मई को भारत लौटने वाली तय उड़ान भी छूट गई। सीमा बंद होने के कारण वे किगाली वापस नहीं जा सके और धीरे-धीरे कांगो के गोमा शहर में फंस गए। वहां से निकलने का कोई तत्काल विकल्प उनके पास नहीं बचा था। इस पूरे मामले में जब मदद की अपील की गई, तो गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सक्रिय होने के निर्देश दिए। इसके बाद गुजरात राज्य अनिवासी गुजराती फाउंडेशन (एनएसजीएफ) ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर समन्वय शुरू किया। साथ ही रवांडा और डीआरसी में स्थित भारतीय दूतावासों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया, ताकि किसी तरह उनकी सुरक्षित वापसी संभव हो सके।

सरकार का किया धन्यवाद


लगातार चल रहे इन प्रयासों का असर आखिरकार बुधवार को देखने को मिला, जब डॉ. अमीन समा को ट्रांजिट अनुमति और भारत लौटने की औपचारिक मंजूरी मिल गई। यह मंजूरी उनके सुरक्षित सफर की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद अब उनके 18 जून को भारत लौटने की पुष्टि हो चुकी है। इस खबर से उनके परिवार और जानने वालों ने राहत की सांस ली है। डॉ. समा ने भी इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए गुजरात सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों का आभार व्यक्त किया है। उनकी सुरक्षित वापसी को प्रशासनिक समन्वय और त्वरित कार्रवाई का एक सफल उदाहरण माना जा रहा है।