
Ahmedabad. सोशल मीडिया पर शक्तिवर्धक दवाओं के आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों को जाल में फंसाने और बाद में खुद को डॉक्टर व पुलिस अधिकारी बताकर ब्लैकमेल करके लाखों रुपए ऐंठने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टीम ने पर्दाफाश किया है। टीम ने अहमदाबाद के वस्त्राल क्षेत्र में चल रहे कॉल सेंटर और उत्तर प्रदेश के बिधूना में शुरू होने जा रहे अन्य कॉल सेंटर पर दबिश देकर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के पुलिस अधीक्षक डॉ.राजदीप सिंह झाला ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि जांच में यह सामने आया कि आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शक्तिवर्धक दवाओं के नाम से विज्ञापन करते थे। यह विज्ञापन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को दैनिक 30 हजार रुपए तक का भुगतान करते थे। विज्ञापन देखकर जो इनसे संपर्क करता, उससे फॉर्म भरवाते थे फिर उसे डॉक्टर बनकर फोन कर दवा के बारे में समझाते और ऑनलाइन ऑर्डर लेते थे।
इसके बाद डाक एवं कूरियर से दवाओं की डिलीवरी करते थे। कई मामलों में डिलीवरी से पहले ही आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी या डॉक्टर बताते हुए दवा मंगवाने वाले को फोन करते और उससे कहते कि उसने प्रतिबंधित दवा मंगाई है, जिससे उसके विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है। इसलिए गिरफ्तारी करनी पड़ेगी और फिर डरा- धमकाकर एफआइआर रद्द कराने के नाम पर दो हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की जबरन वसूली करते थे।
जांच के दौरान जब्त किए गए कंप्यूटरों के डेटा के विश्लेषण में सामने आया कि गिरोह ने देशभर में करीब चार से पांच हजार लोगों को अपना शिकार बनाया है। आरोपियों के कब्जे से 14 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें पांच करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय लेनदेन का पता चला है। इन बैंक खातों के खिलाफ एनसीसीआरपी पोर्टल पर दिल्ली की एक, राजस्थान की दो और उत्तर प्रदेश की तीन शिकायतें दर्ज मिली हैं।
गिरोह का मुख्य आरोपी एवं कॉल सेंटर संचालक वस्त्राल का धीरेंद्र राजावत (36) है। शहर के ईसनपुर का आर्यन रावल (20), सिंगरवा का अनिरुद्ध भदोरिया (20), वस्त्राल का सुमित दिवाकर (20), देवप्रतापसिंह भदोरिया (20) टीम लीडर एवं क्लोजर का काम करते थे। उ.प्र. के बिधूना निवासी देवेंद्रसिंह राजावत (33) खुद को पुलिस कर्मचारी बताते हुए लोगों को डराता -धमकाता और रुपए ऐंठता था। इस गिरोह में शामिल महिला प्रिया कुर्मी को भी पकड़ा है जो मैनेजर, टीम लीडर और क्लोजर की भूमिका निभाती थी।
आरोपियोत्के पास से 44 मोबाइल फोन, 23 सीपीयू, दो लैपटॉप, एक मॉनीटर, तीन कॉलर आइडी फोन, तीन पेन ड्राइव, पांच पासबुक, एक चेकबुक, एक क्यूआर कोड, कॉल ट्रांजैक्शन शीट, शक्तिवर्धक दवाओं के दो बॉक्स, विभिन्न आयुर्वेदिक कंपनियों की पांच स्टैंप जब्त की गई हैं।
जांच में सामने आया कि जो व्यक्ति इनके संपर्क में आने के बाद दवा नहीं खरीदता था उसे भी यह डॉक्टर, पुलिस और कस्टम अधिकारी बनकर डराते धमकाते और दवा खरीदने का दबाव डालते थे।