अहमदाबाद

Ahmedabad: आज भी बेटे की अस्थियों का नहीं किया विसर्जन, घर में जल रहा अखंड दिया

बेटे की तस्वीर के सामने एक साल से जल रहा दीपक, मां की आंखें अब भी नम, विमान हादसे में 15 वर्षीय बेटे को खोने वाले सुरेश-सीता पटणी का दर्द, बंद कर दी चाय की थड़ी, अब उस रास्ते से गुजरतीं भी नहीं, खुद भी 35-40 फीसदी झुलसी थी

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Akash Patni
विमान हादसे में जान गंवाने वाले बेटे आकाश की याद में घर के कोने में अखंड दीपक जलाए हुए हैं मां सीता व पिता सुरेश पटणी।

Ahmedabad. शहर में 12 जून 2025 को दोपहर के समय बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल अतुल्यम परिसर में विमान के क्रैश होकर गिरने की घटना को एक साल पूरा हो गया। इस भयावह हादसे में अपने छोटे बेटे आकाश (15) को खोने वाले सुरेश एवं सीता पटणी ने अब तक उसकी अस्थियों का विसर्जन नहीं किया है। घर के कोने में उसकी तस्वीर के सामने उसकी मां सीता आकाश की याद में अखंड दीपक जलाए हुए हैं। जो सालों-साल यूं ही जलता रखेंगी। यह उन्हें उसकी याद दिलाता है।

घटनास्थल से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर घोडा कैंप के सामने न्यू लक्ष्मीनगर में निवासी सीता पटणी अतुल्यम हॉस्टल परिसर के बाहर चाय की थड़ी (किटली) चलाती थीं। 12 जून 2025 की दोपहर को उनका छोटा बेटा आकाश उन्हें टिफिन देने पहुंचा था। टिफिन देकर वह थड़ी के सामने ही सड़क के उस पार कॉर्नर पर चारपाई पर सो गया। इसी दौरान विमान क्रैश होकर गिरा। आग का गोला बना विमान के पंख (विंग) का हिस्सा आकाश के ऊपर गिरा। इसे देख सीता बेटे को बचाने दौड़ीं, लेकिन आग की लपटें और धुएं का गुबार इतना था कि वे आगे ही नहीं बढ़ पाईं। रोते, चिल्लाते भागती सीता की मदद गुहार लगा रही थीं। चाहकर भी लोग आगे नहीं आ पा रहे थे। सीता खुद भी झुलस गई थीं, जिससे 108 की टीम ने उन्हें अस्पताल पहुंचाकर भर्ती करा दिया।

सीता कहती हैं कि हादसे के करीब तीन महीने बाद वे ठीक हुईं। चाय की थड़ी बंद कर दी है। अब तो वे उस रास्ते से भी होकर नहीं गुजरती हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब बेटे आकाश की याद न आती हो। सीता की कनपटी, हाथ, पैर और पीठ का हिस्सा झुलस गया था। उन्हें 20 दिन सिविल अस्पताल और करीब दो महीने निजी अस्पताल में उपचार लेना पड़ा। इन जख्मों में आज भी खिचाव होता है।

...इसलिए नहीं विसर्जित कीं अस्थियां

आकाश के पिता सुरेश पटणी बताते हैं कि अब तक आकाश की अस्थियों का विसर्जन नहीं किया है। क्योंकि क्या पता कहीं हमसे कोई भूल चूक हो गई हो, जिससे इस हादसे में उसकी जान चली गई। अब एक साल बाद उसकी याद में शुक्रवार 12 जून को भजन संतवाणी, सुंदरकांड, शांतिपाठ कराएंगे। उसके बाद उसकी अस्थियों का विसर्जन करेंगे। संभवत: काशी जाकर अस्थियां विसर्जित करेंगे। सुरेश बताते हैं कि आकाश की याद में उसकी तस्वीर के सामने दीपक जलाया है। वह सालों-साल यूं ही जलता रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि व ह आकाश की याद में स्मारक बनाने को कहीं भी जगह प्रदान करे। हालांकि सरकार की ओर से घोषित आर्थिक मदद मिल गई है।

Published on:
12 Jun 2026 10:03 pm