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अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसीः जब वार्ड में ‘विश्वास’ भी अविश्वसनीय लग रहा था. ..

हर तरफ एम्बुलेंस के सायरन, घायल यात्रियों की चीखें और अपने परिजनों की तलाश में भटकते लोगों की बेचैनी दिखाई दे रही थी। उस संकट की घड़ी में गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पियूष मित्तल को घायलों के लिए बनाए गए विशेष वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हादसे की पहली बरसी पर पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने उस दिन के कई ऐसे पल साझा किए, जो आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा हैं। इसके प्रमुख अंश इस प्रकार हैं।

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Ahmedabad Plane Crash

Civil hospital Ahmedabad

Ahmedabad: 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। दुर्घटना के बाद सिविल अस्पताल अचानक आपदा प्रबंधन के सबसे बड़े केंद्र में बदल गया। हर तरफ एम्बुलेंस के सायरन, घायल यात्रियों की चीखें और अपने परिजनों की तलाश में भटकते लोगों की बेचैनी दिखाई दे रही थी। उस संकट की घड़ी में गवर्नमेंट स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पियूष मित्तल को घायलों के लिए बनाए गए विशेष वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हादसे की पहली बरसी पर पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने उस दिन के कई ऐसे पल साझा किए, जो आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा हैं। इसके प्रमुख अंश इस प्रकार हैं।

सवाल : हादसे के बाद सिविल अस्पताल का माहौल कैसा था?

जवाब : माहौल किसी युद्ध जैसी आपात स्थिति से कम नहीं था। लगातार एम्बुलेंस पहुंच रही थीं। चारों तरफ सायरनों की आवाज गूंज रही थी। लोग अपने परिजनों की तलाश में अस्पताल पहुंच रहे थे। कुछ ही समय में करीब 60 घायलों को हमारे वार्ड में भर्ती किया गया। चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ परिजनों की भीड़ को संभालना और सही जानकारी देना भी बड़ी चुनौती थी। वह दिन कभी नहीं भूलने वाला दिन बन गया है।

प्रश्न : ‘विश्वास’ से मुलाकात का वह पल कैसा था?

डॉ. मित्तल : यह शायद पूरे हादसे का सबसे अविश्वसनीय क्षण था। शुरुआती जानकारी यही थी कि विमान में सवार कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा है। इसी बीच उपचार के लिए एक घायल युवक हमारे वार्ड में लाया गया, जहां अन्य जख्मी मरीजों का इलाज चल रहा था। उसने बताया कि वह उसी विमान का यात्री है। पहले तो हमें उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ। उसने अपना टिकट और यात्रा संबंधी जानकारी दिखाई। इसके बाद मैंने तत्काल चिकित्सा अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जब पुष्टि हुई कि उसका नाम ‘विश्वास’ है और वह विमान का एकमात्र जीवित यात्री है, तो वार्ड में मौजूद डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य लोग आश्चर्यचकित रह गए। उस समय सचमुच ऐसा लगा कि ‘विश्वास’ भी अविश्वसनीय है। विमान से केवल विश्वास की ही जिंदगी बची थी. अन्य सभी यात्रियों व क्रू मैंबर की हादसे में मौत हो गई थी।

सवाल : घायलों की स्थिति कितनी गंभीर थी?

जवाब : अधिकांश मरीज गंभीर रूप से झुलसे हुए थे। दो मरीजों की हड्डियां टूट गई थीं, जिनकी सर्जरी करनी पड़ी। कुछ गंभीर घायलों को आइसीयू में भर्ती करना पड़ा। अधिकांश घायलों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और बाद में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस हादसे में घायल हुए कुछ लोगों की मौत भी हुई थी।

प्रश्न : एक डॉक्टर के रूप में इस हादसे ने आपको क्या सिखाया?

जवाब: मैंने अपने चिकित्सा जीवन में कई गंभीर मामले देखे हैं, लेकिन यह घटना अलग थी। एक तरफ मौत का साया था, दूसरी तरफ अपनों को खोजती उम्मीद भरी आंखें। उस दिन महसूस हुआ कि चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों को मानसिक संबल देना और उम्मीद बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। विमान हादसे का वह दिन मेरे पेशेवर जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक दिनों में हमेशा शामिल रहेगा।