
राजकोट. बच्चों की छोटी-सी जिज्ञासा कई बार बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। दीव ऐसी ही एक घटना में 4 साल की बच्ची की सांसनली में ब्रेसलेट का करीब एक सेंटीमीटर आकार का मोती 22 दिनों तक फंसा रहा। बच्ची लगातार सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ से परेशान रही। खास बात यह रही कि प्रारंभिक चेस्ट एक्स-रे में स्थिति सामान्य बताई गई। लक्षण बने रहने पर जब चेस्ट सीटी स्कैन कराया गया तो सांसनली में बाहरी वस्तु फंसी होने का पता चला।
इसके बाद बच्ची को राजकोट के कान-नाक-गला (ईएनटी) सर्जन डॉ. हिमांशु ठक्कर के पास लाया गया। जांच में पता चला कि मोती दाहिने मुख्य ब्रोंकस में मजबूती से फंसा हुआ था। सामान्य तरीके से इसे निकालना आसान नहीं था, क्योंकि करीब एक सेंटीमीटर का मोती गोल, कठोर और बेहद चिकना था। मोती और सांसनली की दीवार के बीच ब्रोंकोस्कोपिक फोर्सेप्स डालने के लिए जगह भी बहुत कम थी।
डॉ. ठक्कर ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत एयरवे एंडोस्कोपिक तकनीक से ब्रोंकोस्कोपी शुरू की। मोती को पकड़ने के दौरान उसके फिसलने का खतरा था और कठोर होने के कारण उसे तोड़कर निकालना भी संभव नहीं था। सावधानीपूर्वक ब्रोंकोस्कोपिक फोर्सेप्स की मदद से मोती को पकड़कर एक ही प्रयास में पूरी तरह बाहर निकाल लिया गया। प्रक्रिया कुछ ही मिनट में पूरी हुई और बच्ची को न तो कोई बाहरी चीरा लगा, न टांके लगाने पड़े। इससे बड़ी सर्जरी की जरूरत भी टल गई।
डॉ. ठक्कर ने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों की पहुंच से मोती, मार्बल, ब्रेसलेट या आभूषणों के छोटे हिस्से और खिलौनों के छोटे पार्ट दूर रखें। ऐसी वस्तु सांसनली में जाने के बाद लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या सीटी जैसी आवाज हो तो इसे सामान्य खांसी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती एक्स-रे सामान्य आने पर भी सांसनली में बाहरी वस्तु की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं होती।