
Ahmedabad: शहर में गुरुवार को निकली 149वीं भगवान जगन्नाथ रथयात्रा में सरसपुर एक बार फिर ननिहाल की परंपरा का जीवंत साक्षी बना। जैसे ही भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के रथ सरसपुर पहुंचे, पूरा इलाका लोकगीतों, जयघोष और श्रद्धा के रंग में डूब गया। भांजे-भांजी के ननिहाल आने पर जिस आत्मीयता से स्वागत होता है, उसी भाव से भगवान के मामेरा की रस्म निभाई गई।
सरसपुर स्थित भगवान रणछोड़राय मंदिर के निकट मामेरा की रस्म निभाई गई। परंपरा के अनुसार भगवान को ननिहाल की ओर से भेंट स्वरूप वस्तुएं अर्पित की गईं। यहां यजमान तेजस दवे परिवार की ओर से विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ को वस्त्र, मोरपंख और आभूषण अर्पित किए गए। बड़े भाई बलराम को भी वस्त्र और अलंकार भेंट किए गए, जबकि बहन सुभद्रा को आभूषण, वस्त्र और पारंपरिक श्रृंगार सामग्री समर्पित की गई।महिलाओं ने पारंपरिक गीतों से भगवान का स्वागत किया तो श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान के दर्शन किए। भजनों और पारंपरिक गीतों के बीच 'जय रणछोड़ माखन चोर' और 'जय जगन्नाथ' के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोई भांजा वर्षों बाद अपने ननिहाल पहुंचा हो और उसके स्वागत में पूरा परिवार उमड़ पड़ा हो। यहां यजमान तेजस दवे परिवार की ओर से विधि-विधान के साथ मामेरा की रस्म निभाई गई। भगवान जगन्नाथ को वस्त्र, मोरपंख और आभूषण अर्पित किए गए। वहीं भगवान बलराम को भी वस्त्र और अलंकार भेंट किए गए, जबकि बहन सुभद्रा को आभूषण, वस्त्र और पारंपरिक श्रृंगार सामग्री समर्पित की गई।
उमसभरी गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। लोग सुबह से ही यहां जुटने लगे थे। गजराज के आते ही भक्तों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
सरसपुर में रथयात्रा के दौरान पूरा इलाका किसी विशाल मेले में तब्दील नजर आया। बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन और मामेरा की परंपरा के साक्षी बनने पहुंचे। पोलों और शेरियों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाए तो बच्चे भगवान के रथ की एक झलक पाने को उत्साहित दिखाई दिए। बुजुर्ग वर्षों पुरानी परंपराओं को याद करते नजर आए। उमसभरी गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हर गली और चौक में भक्ति, सेवा और उल्लास का ऐसा माहौल था, जिसने पूरे सरसपुर को एक विशाल धार्मिक मेले का स्वरूप दे दिया।
इस वर्ष मामेरा की परंपरा का विस्तार भी देखने को मिला। सरसपुर की नानी वासणशेरी स्थित प्राचीन रणछोड़राय मंदिर की ओर से भी महंत लक्क्ष्मणदास की मौजूदगी में मामेरा की रस्म संपन्न हुई। यजमानों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ भगवान को पारंपरिक भेंट अर्पित की। यजमान रामप्रतापसिंह चौहान ने बताया कि भगवान के ननिहाल में मामेरा करने का अवसर उनके परिवार के लिए ईश्वर का विशेष आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ को चांदी की बांसुरी, सुदर्शन चक्र, हल तथा अन्य पारंपरिक भेंटें अर्पित की गईं। वहीं बहन सुभद्रा को स्वर्ण-रजत आभूषण और श्रृंगार सामग्री समर्पित की गई। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ना जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है।