अहमदाबाद

रेशमा पटेल का सीएम को पत्र : पाटीदार आंदोलन के शहीदों के परिजनों को जल्द दिलाएं नौकरी

रेशमाबेन पटेल ने फेसबुक पर सीएम को पत्र, एक साल पहले २१ अक्टूबर २०१७ को शामिल हुई थीं भाजपा में  
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Reshma patel
रेशमा पटेल का सीएम को पत्र : पाटीदार आंदोलन के शहीदों के परिजनों को जल्द दिलाएं नौकरी

अहमदाबाद. लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात से 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के लोकार्पण के साथ प्रचार अभियान का आगाज करने वाले हैं। ऐसे में भाजपा में शामिल हुई पाटीदार नेता रेशमा पटेल ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। रेशमा एक साल पहले 21 अक्टूबर २०१७ को ही भाजपा से जुड़ी थीं।
रेशमा पटेल ने रविवार को अपने फेसबुक एकाउंट के माध्यम से सीएम विजय रूपाणी के नाम खुला पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई। जिसमें उन्होंने विशेष रूप से पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद हुए समाज के पाटीदार युवाओं में से किसी भी शहीद परिवार के एक भी सदस्य को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिलने की बात कही है।
उन्होंने लिखा कि वे भारतीय जनता पार्टी में कुछ शर्तों पर शामिल हुई थीं। उसमें से एक महत्वपूर्ण शर्त पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद होने वाले समाज के युवाओं के परिवार के सदस्य को सरकार की ओर से नौकरी दिलाने की थी। रेशमा ने लिखा कि यूं तो एक साल में सभी शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी मिलने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक एक को भी नौकरी नहीं मिली है। इस मुद्दे को उन्होंने जब भी मौका मिला तब भाजपा के आला नेताओं और सरकार के समक्ष उठाया।
रेशमा ने लिखा कि वे बड़े दुख के साथ यह कह रही हैं कि अब तक सिर्फ एक घायल पाटीदार के परिजन को नौकरी मिली है। अन्य परिवार वंचित हैं। रेशमाबेन पटेल ठीक एक साल पहले ही 21 अक्टूबर २०१७ को भाजपा से जुड़ी थीं।

मांग सच्ची तरह से की हो तो स्वागत : पनारा
पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के संयोजक मनोज पनारा ने कहा कि रेशमाबेन ने वाकई में शहीद परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने की मांग की है तो पास टीम उसका स्वागत करती है। क्योंकि 'पास' तो साढ़े तीन सालों से इस मांग को दोहराती आई है, लेकिन सरकार की ओर से सभी मांगें पूरी करने की केवल दलील दी जा रही है। अब सरकार की वकालत करने वालों को रेशमाबेन के पत्र और खुलासे को ध्यान में लेना चाहिए। हालांकि पनारा ने रेशमा के पत्र को शंका के नजरिए से भी देखते हुए कहा कि पहले पत्र को सीएम तक पहुंचाना चाहिए। उसके बाद सोशल मीडिया में वायरल करना चाहिए। इससे लगता है कि उनका प्रयास राजनीतिक है और केवल प्रचार पाना है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए भी यह पत्र लिखे जाने की उन्हें आशंका है। पहले उन्होने कोई शर्त का उल्लेख नहीं किया था। यदि वाकई में चिंतित हैं तो जब तक शहीदों के परिजन को नौकरी नहीं मिलती तब तक उन्हें पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए।

Published on:
21 Oct 2018 11:07 pm