50 हजार से अधिक लोग सीधे तौर पर और एक लाख परोक्ष रूप से नमक पैदावार से जुड़े हैं, नमक की फसल बर्बाद हुई तो अगरिया समुदाय को होगा 250 करोड़ से अधिक का नुकसान
Ahmedabad. ईरान-इजराइल और अमरीका के बीच युद्ध के हालातों के चलते बंद होर्मुज स्ट्रेट से पेट्रोलियम उत्पादों, गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते देश में पेट्रोल, डीजल, गैस की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है जिसका असर अब जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी बाधित हुई है। इसके चलते अब गुजरात के छोटे रण में पैदा होने वाले नमक का कामकाज भी प्रभावित होने लगा है।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ.पार्थिवराज सिंह कठवाडिया ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि डीज़ल की कमी के कारण छोटे रण के अगरिया समुदाय (नमक पैदा करने वाले श्रमिक) पर गंभीर असर पड़ा है। देश का 70 फीसदी नमक का उत्पादन गुजरात करता है। छोटे रण के आसपास जैसे सांतलपुर, माळिया, खारा घोड़ा, आडेसर, धांधुका, हळवद, राधनपुर के गांवों लगभग 3500 से अधिक आगरिया हैं। यहां 60 लाख टन से अधिक का वार्षिक नमक उत्पादन 10 एकड़ के अगर वाले करते हैं। डीज़ल की कमी के कारण अगरिया नमक को अगर से गंजा तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों द्वारा डीज़ल की कमी के कारण अगरिया व्यवसाय से जुड़े लोगों को इनकार किया जा रहा है। उनसे डीज़ल की व्यवस्था करने की मांग की जा रही है। यदि राज्य सरकार ने जल्द ही अगरियाओं के लिए पर्याप्त डीजल की आपूर्ति की व्यवस्था नहीं की तो छोटे अगरियाओं का 250 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लगभग 50,000 से अधिक लोग सीधे तौर पर और एक लाख से अधिक लोग परोक्ष रूप से नमक के व्यवसाय से जुड़े हैं। कच्छ, पाटण, सुरेंद्रनगर, मोरबी जिलों के अगर उद्योगों पर डीजल की कमी का असर दिखने लगा है। वे अपने अगर (नमक की क्यारी) में हिटाची, ट्रक जैसे वाहनों का उपयोग करने में काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। यह समस्या छोटे अगरियाओं के लिए ज्यादा गंभीर है।बड़े अगर मालिक निजी कंपनियों से डीज़ल बल्क में लेते थे, उन्हें ज्यादा समस्या नहीं है। छोटे अगरिया व्यवसायी को केवल 20 लीटर डीज़ल दिया जा रहा है, जबकि उनकी खपत 500 लीटर से अधिक की है।