अहमदाबाद

आणंद मूल के समित गोहिल का कनाडा की इंटरनेशनल क्रिकेट टीम में चयन

आणंद शहर के मूल निवासी और वर्तमान में कनाडा में रहकर कनाडा की नागरिकता हासिल करने वाले समित गोहिल ने महज 12 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। शुरुआत में वे आणंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा संचालित कैंप में प्रैक्टिस करने जाते थे। इंटरस्कूल टूर्नामेंट के बाद उन्होंने जिला टूर्नामेंट खेलना शुरू किया। इसके बाद एलीकोन क्रिकेट में खेलना शुरू किया।
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Samit Gohil, Originally from Anand, Selected for Canada's International Cricket Team
समित गोहिल

आणंद. शहर के मूल निवासी क्रिकेटर समित गोहिल का कनाडा की इंटरनेशनल क्रिकेट टीम में चयन हुआ है। यह खबर मिलने पर उनके परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर जश्न मनाया।
आणंद शहर के मूल निवासी और वर्तमान में कनाडा में रहकर कनाडा की नागरिकता हासिल करने वाले समित गोहिल ने महज 12 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। शुरुआत में वे आणंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा संचालित कैंप में प्रैक्टिस करने जाते थे। इंटरस्कूल टूर्नामेंट के बाद उन्होंने जिला टूर्नामेंट खेलना शुरू किया। इसके बाद एलीकोन क्रिकेट में खेलना शुरू किया।
क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के चलते महज 16 साल की उम्र में समित का गुजरात अंडर-19 टीम में चयन हुआ था। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें गुजरात की टीम से रणजी ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 80 से ज्यादा मैच खेले। पंजाब और गुजरात के बीच खेले गए मुकाबले में उन्होंने 140 रनों की शानदार पारी खेली थी।
रणजी ट्रॉफी में 2017 मे गुजरात की टीम की ओर से ओडिशा के खिलाफ फाइनल मुकाबले में समित ने नोटआउट 359 रन बनाकर रेकार्ड बनाया था। करीब तीन वर्ष पहले समित कनाडा गए और वहीं स्थायी रूप से बस गए। कनाडा में भी उन्होंने विभिन्न मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए औसतन 85 से ज्यादा रन बनाए। कनाडा की नागरिकता मिलने के बाद समित का कनाडा की इंटरनेशनल क्रिकेट टीम में चयन कर लिया गया। अब ओमान में होने वाले टूर्नामेंट से समित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना प्रदर्शन दिखाएंगे।

मां ईलाबेन का बड़ा योगदान

समित के क्रिकेट कॅरियर में उनकी मां ईलाबेन का बड़ा योगदान रहा। मां ने बताया कि समित को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। बाजार जाते समय भी उनकी जिद बैट खरीदने की होती थी। इतना ही नहीं, वे सोते समय भी अपने साथ बैट और बॉल रखते थे और खाना खाने बैठते समय भी बैट-बॉल उनके साथ ही रहते थे। समित का सपना था कि वे एक दिन इंटरनेशनल क्रिकेट खेलें और उनका यह सपना साकार हो गया।

Updated on:
03 Oct 2026 10:09 pm
Published on:
03 Oct 2026 10:09 pm