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SC Judge M R Shah says, Every citizen has right to speedy justice
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एम. आर. शाह ने कहा कि आम आदमी को न्याय दिलाना हमारा पहला कर्तव्य है। त्वरित न्याय हर किसी का अधिकार है। जिला न्यायपालिका न्यायतंत्र का स्तंभ है। यह जितनी मजबूत होगी, न्यायतंत्र की इमारत भी उतनी ही मजबूत बनेगी। वे शानिवार को अहमदाबाद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में गुजरात राज्य न्यायिक अधिकारियों के प्रथम अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अदालत में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयारी, समय की पाबंदी और शिष्टता के रूप में ‘3 पी’ का मंत्र दिया।
न्याय में विलंब और मामलों के बैकलॉग के संबंध में आत्ममंथन करने पर जोर देते हुए जस्टिस शाह ने वैकल्पिक न्याय पद्धतियों को अपनाकर न्याय में विलंब को टालने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि माइक्रो प्लानिंग तथा स्क्रूटनी समिति जैसी समितियां गठित करके भी अदालत का समय बचाया जा सकता है।
न्यायालय किसी भी आम आदमी का आखिरी सहारा: जस्टिस पारडीवाला
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे. बी. पारडीवाला ने वर्चुअल तरीके से संबोधन देते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित मूल्यों को चरितार्थ करने का दायित्व न्यायतंत्र का है। न्यायालय किसी भी आम आदमी का आखिरी सहारा होती है। न्यायतंत्र को संविधान के रक्षक की भूमिका निभानी होती है। संवैधानिक मूल्यों की रक्षा कर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की स्थापना करना न्यायतंत्र का दायित्व है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को ‘कोर्ट ऑफ लॉ’ नहीं बल्कि ‘कोर्ट ऑफ जस्टिस’ की भूमिका निभानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बेलाबेन एम. त्रिवेदी ने वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए कहा कि न्यायतंत्र में निष्पक्ष रहते हुए ही कार्य करना आवश्यक है।
न्यायिक अधिकारियों को आशावादी-सकारात्मक बनना चाहिए
गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि प्रधान जिला न्यायाधीश पर कई अहम जिम्मेदारी होती है। सभी न्यायिक अधिकारियों को आशावादी और सकारात्मक बनना चाहिए। ‘मैं नहीं कर सकता’ के बजाय ‘आई केन’ का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने जिला न्यायतंत्र के दायित्व को काफी अहम करार देते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि वे प्रो-एक्टिव बनकर कार्य करें।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गुजरात में न्याय क्षेत्र में मुख्यमंत्री तथा गुजरात सरकार का बहुत अच्छा सहयोग प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री के साथ जब बैठक हुई थी, तब उन्होंने एक ही दिन में न्यायतंत्र से जुड़े 27 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।
मुख्य न्यायाधीश ने राज्य की विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों का ब्यौरा देते हुए राज्य के न्यायिक अधिकारियों से गुणवत्ता व परिमाण की दृष्टि से उच्च स्तरीय प्रदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना प्रत्येक न्यायिक अधिकारी का दायित्व है कि लोगों को त्वरित और गुणवत्ता युक्त न्याय मिले तथा किसी को भी न्याय मांगने के लिए परेशान न होना पड़े।