
मृतक प्रकाश चंद्र। (फाइल फोटो)
राजकोट. अमरेली जिले की राजुला तहसील के कोवाया गांव के पास एक शेरनी ने एक प्रवासी युवक पर जानलेवा हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। युवक के शरीर का अधिकांश हिस्सा शेरनी खा गई। घटनास्थल से वन विभाग और स्थानीय लोगों को युवक का सिर और पसलियों के कुछ टुकड़े मिले। मृतक युवक की पहचान प्रकाश चंद्र के रूप में हुई जो मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी था।
जानकारी के अनुसार युवक स्थानीय होटल-रेस्तरां में काम कर अपना जीवनयापन करता था। सोमवार देर रात वह घर जाने के लिए होटल से निकला था। इसी दौरान अंधेरे में घात लगाकर बैठी शेरनी ने उस पर अचानक हमला कर दिया। युवक को दबोचकर और घसीटकर पास की झाड़ियों में ले जाकर शेरनी ने युवक के शरीर को नोंच दिया। मंगलवार सुबह सूचना मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। वहां केवल सिर और हड्डियों के अवशेष देखकर लोगों के होश उड़ गए।
एक निजी कंपनी के कर्मचारी अमरु वाघ ने बताया कि आसपास पांच-सात बड़ी कंपनियां स्थित हैं, जहां हजारों लोग दिन-रात अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। इस क्षेत्र में शेर अक्सर खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। इस कारण आने-जाने वाले कर्मचारियों को लगातार भय का सामना करना पड़ता है। वन विभाग को तत्काल कड़े कदम उठाकर लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में शेरों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।
घटना की सूचना मिलते ही राजुला रेंज के वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए पालीताणा-शेत्रुंजी डिवीजन के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) विरलसिंह चावड़ा और रेंज फॉरेस्ट अधिकारी (आरएफओ) सहित वन विभाग की टीम को घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में तैनात कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।
वन विभाग द्वारा क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें चार शेरों के एक समूह की मौजूदगी का पता चला। एसीएफ चावड़ा ने बताया कि मानव पर हमले की गंभीर घटना के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक शेर को ट्रैंक्विलाइज़ कर पकड़ लिया और उसे पिंजरे में रखा गया है। समूह के अन्य शेरों को पकड़ने के लिए व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि शेरों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में जाने से पहले वन विभाग को सूचित करें, ताकि ऐसी गंभीर घटनाओं को रोका जा सके।
वन मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया ने घटना पर शोक जताते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में एशियाई शेर मानवों के साथ संघर्ष से बचने का प्रयास करते हैं, लेकिन कभी-कभी परिस्थितिजन्य कारणों से उनके व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव आ जाता है, जो इस प्रकार की दुखद घटनाओं का कारण बनता है। मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच उचित संतुलन बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक निवारक और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
Published on:
16 Jun 2026 10:08 pm
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