
Ahmedabad. गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीसीओई) गांधीनगर ने ऑपरेशन म्यूलहंट 2 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी कंपनियां बनाकर देश के 18 राज्यों में 2.86 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी फर्मों के नाम पर 12 बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल फ्रॉड को अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ऑक्सफोर्ड एवेन्यू, आश्रम रोड अहमदाबाद और सीटीएम स्थित यमुना-2 एस्टेट में फर्जी कंपनियों के कार्यालय संचालित किए। जांच के दौरान 72 म्यूल खातों की जानकारी मिली, जिनमें से 22 खातों पर राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर 54 शिकायतें दर्ज मिलीं हैं। इन शिकायतों में बिहार में 93 लाख रुपए की इंटरनेट बैंकिंग डिपॉजिट ठगी, कर्नाटक में 70 लाख रुपए की निवेश ठगी और महाराष्ट्र में 38 लाख रुपए के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का मामला शामिल है।
जांच में सामने आया कि पकड़े गए आरोपियों में दीक्षित पटेल की डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में अहम भूमिका सामने आई है। वह मास्टर माइंड में से एक है। गिरफ्तार आरोपियों में निकुंज कुमार पटेल, दीक्षित पटेल और सुमित सोनी शामिल हैं। तीनों ही निवासी अहमदाबाद के रहने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार निकुंज और दीक्षित ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ट्रैवेलफ्लूक्स प्राइवेट लिमिटेड और ट्रावोक्रेस्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम से दो फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर कॉर्पोरेट बैंक खाते खुलवाए और उनकी किट सुमित व अन्य साइबर ठगों को उपलब्ध कराकर आर्थिक लाभ कमाया। दीक्षित ने आठ लाख, सुमित ने एक लाख लाभ कमाया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, यूपीआइ फ्रॉड, डिपॉजिट फ्रॉड, ट्रेडिंग फ्रॉड, जॉब स्कैम, फिशिंग (एपीके फाइल), ऑनलाइन शॉपिंग और इंटरनेट बैंकिंग डिपॉजिट स्कैम जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपियों ने ठगी की रकम को ट्रेस होने से बचाने के लिए पेमेंट गेटवे के मर्चेंट आइडी (एमआइडी) खातों का भी इस्तेमाल किया, जिससे जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन, 8 चेकबुक, 31 डेबिट/क्रेडिट कार्ड और एक लैपटॉप बरामद किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।