सौराष्ट्र-कच्छ के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ युवा प्रतिभा मिलन कार्यक्रम राजकोट. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सेवा भारती भवन के पास सौराष्ट्र-कच्छ के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ युवा प्रतिभा मिलन कार्यक्रम में संवाद किया।युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का भाग्य बदलने के लिए संपूर्ण समाज की […]
राजकोट. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सेवा भारती भवन के पास सौराष्ट्र-कच्छ के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ युवा प्रतिभा मिलन कार्यक्रम में संवाद किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का भाग्य बदलने के लिए संपूर्ण समाज की सक्रियता आवश्यक है। युवा विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए काम करते हैं, तब देश क्या है इसकी स्पष्ट कल्पना मन में होनी चाहिए।
संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की ओर से संघ की स्थापना से पूर्व हुए मनोमंथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने संघ की स्थापना की पूर्वभूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि, संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करने के लक्ष्य के साथ संघ कार्यरत है।
हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि, जैसे ब्रिटेन में ब्रिटिश, अमेरिका में अमेरिकन, वैसे ही हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदू हैं। भारत और हिंदुस्तान दोनों अलग नहीं हैं, एक ही हैं, भारत वह स्वभाव है। हिंदू वह स्वभाव है। एकता से चलने का स्वभाव ही हिंदू है। उन्होंने कहा कि हमारी भावना वसुधैव कुटुम्बकम् की रही है। सनातन, भारतीय, इंडिक, आर्य, हिंदू सभी समान नाम हैं। हिंदू शब्द सरल है और सहजता से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू आदिकाल से, परंपरा से इस भूमि पर रहते हैं और देश को शक्तिशाली और विकसित बनाने की जिम्मेदारी संपूर्ण समाज की है। इसलिए संपूर्ण हिंदू समाज को एक करके, गुणवत्ता का निर्माण करके विश्व कल्याण के लिए देश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य के साथ संघ नियमित रूप से काम कर रहा है।
संघ की विशिष्ट कार्यशैली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा था कि, संघ शाखा के माध्यम से गुणवत्तायुक्त, श्रेष्ठ, निष्ठावान स्वयंसेवक तैयार करता है। ऐसे स्वयंसेवक समर्पण भाव से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं, विभिन्न सेवाकार्य करते हैं। संघ को समझने के लिए संघ में ही आना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि देश का भाग्य बदलने के लिए संपूर्ण समाज की सक्रियता आवश्यक है। समाज में भी आचरण का परिवर्तन आवश्यक है। हालांकि सभी लोग शाखा में न आ सकें, यह ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा पंच परिवर्तन का विचार प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण : पानी बचाओ, प्लास्टिक हटाओ, पौधे लगाओ, स्वबोध, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य के पांच क्षेत्रों में कोई भी नागरिक छोटे-बड़े काम करके भी देशहित में योगदान दे सकता है।