अहमदाबाद

हृदय ट्रांसप्लांट के चलते युवक को मिली नई जिंदगी

दो साल से हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मूलरूप से अमरेली हाल में सूरत में रहने वाले 37 वर्षीय किशन पेथाणी को नई जिंदगी मिल गई।
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um mehata hospital
हृदय ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज को ले जाते।

ahmedabad: दो साल से हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मूलरूप से अमरेली हाल में सूरत में रहने वाले 37 वर्षीय किशन पेथाणी को नई जिंदगी मिल गई। बीमारी के कारण उनका हृदय बुरी तरह कमजोर हो चुका था और डॉक्टरों ने हृदय प्रत्यारोपण को ही आखिरी विकल्प बताया था।

ऐसे में एक ब्रेनडेड दाता के परिवार के फैसले से मिले हृदय ने किशन को नई उम्मीद दी। अहमदाबाद के यूएन मेहता हार्ट अस्पताल में उनका सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। लाखों रुपए खर्च होने वाली यह जटिल सर्जरी पूरी तरह नि:शुल्क हुई।किशन पिछले दो वर्षों से मुंबई, अहमदाबाद और सूरत के विशेषज्ञों से उपचार करा रहे थे।

सूरत के निजी अस्पताल में उनके दो स्टेंट भी डाले गए, लेकिन समय के साथ हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा। प्रत्यारोपण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर उन्होंने स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया से मदद मांगी। मंत्री के प्रयासों से यूएन मेहता अस्पताल में उनका उपचार संभव हुआ।

अंगदान करने वाले परिवार की उदारता प्रेरणादायी

स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि एक ब्रेनडेड व्यक्ति के अंगदान से 7 से 8 जरूरतमंद लोगों को जीवन मिल सकता है। उन्होंने अंगदान करने वाले परिवार की उदारता को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की।

पिता की स्मृति को चिरंजीव रखने को बेटे ने किया त्वचादान

 पिता को खोने का दुख हर परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक होता है, लेकिन अहमदाबाद में एक बेटे ने इसी दुख के बीच ऐसा निर्णय लिया, जो अनजान लोगों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो सकता है।निकोल निवासी 73 वर्षीय मथुर वेकरिया के निधन के बाद उनके पुत्र किशोर ने पिता की स्मृति को चिरंजीव रखने के लिए उनकी त्वचा दान करने का फैसला किया। समाजसेवी संस्था पारेवड़ा ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने परिवार को त्वचादान के महत्व की जानकारी दी, जिसके बाद पुत्र ने सहमति दी।

परिवार की अनुमति मिलने पर पारेवड़ा ग्रुप ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल को सूचना दी। इसके बाद प्लास्टिक सर्जरी विभाग की स्किन बैंक टीम वेकरिया के घर पहुंची और जरूरी प्रक्रिया पूरी कर उनकी पीठ के हिस्से से त्वचा प्राप्त की। सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि अब तक अस्पताल को 49 स्किन डोनेशन प्राप्त हो चुके हैं।अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. जयेश सचदे ने बताया कि त्वचादान विशेष रूप से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दान की गई त्वचा घाव पर आवरण का काम करती है, संक्रमण का खतरा कम करती है और घाव भरने में मदद करती है।

Updated on:
06 Sept 2026 10:50 pm
Published on:
06 Sept 2026 10:50 pm