छोटा उदेपुर : नसवाडी तहसील के घुमना गांव की घटना छोटा उदेपुर. जिले की नसवाडी तहसील के घुमना गांव में झोली में ले जाते महिला ने रास्ते पर बच्चे को जन्म दे दिया।जानकारी के अनुसार, घुमना गांव निवासी गर्भवती महिला रवीता विकेश भील को रविवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक पक्की सड़क के […]
छोटा उदेपुर. जिले की नसवाडी तहसील के घुमना गांव में झोली में ले जाते महिला ने रास्ते पर बच्चे को जन्म दे दिया।
जानकारी के अनुसार, घुमना गांव निवासी गर्भवती महिला रवीता विकेश भील को रविवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक पक्की सड़क के अभाव के कारण परिजन झोली में लेकर निकले।
कच्चे रास्ते के कारण निजी जीप छोटी उमर गांव में खड़ी थी, जबकि 108 एम्बुलेंस सांकीबारी गांव में खड़ी थी। झोली में लगभग आधा किलोमीटर का रास्ता तय करते ही महिला का प्रसव कच्चे रास्ते पर ही हो गया। इसके बाद जच्चा-बच्चा को छोटी उमर गांव ले जाया गया।
महिला के पति विकेश ने 2 हजार रुपए किराया देकर छोटी उमर गांव से निजी जीप से महिला को सांकीबारी गांव के पक्के रास्ते पर खड़ी 108 एम्बुलेंस तक पहुंचाया। वहां से दुग्धा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर भर्ती कराया गया। उनकी स्थिति अच्छी बताई गई है।
खेन्दा गांव की कच्ची सड़क की जगह पक्की सड़क का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ। इसी कारण 108 एम्बुलेंस को सांकीबारी गांव तक पहुंचने के लिए 6 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ा। खेन्दा गांव की सड़क होने पर 108 एम्बुलेंस केवल 3 किलोमीटर में छोटी उमर गांव तक पहुंच सकती थी।
वहीं, छोटा उदेपुर जिले की कवांट तहसील के वजेपुर गांव की एक गर्भवती महिला के गर्भ में जुड़वां बच्चे ब्रीच िस्थति में थे। रविवार को महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, परिजनों ने 108 एम्बुलेंस को बुलाया। एम्बुलेंस में ड्यूटी पर मौजूद इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (इएमटी) राकेश राठवा को जांच रिपोर्ट में पता लगा कि महिला जुड़वा बच्चों की मां बनने वाली है। इसलिए तुरंत उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकले।
रास्ते में ही महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ गई और वहीं प्रसव कराना पड़ा। ब्रीच िस्थति में होने के कारण महिला और दोनों बच्चों की जान जोखिम में थी। लेकिन 108 एम्बुलेंस के इएमटी राकेश और पायलट मनीष राठवा ने अपनी कुशलता, एम्बुलेंस में उपलब्ध संसाधनों और अहमदाबाद के चिकित्स्क रमणिकभाई के मार्गदर्शन से एम्बुलेंस में ही प्रसव कराया। माता और जुड़वां नवजात शिशुओं को आवश्यक उपचार दिया गया और उनकी स्थिति खतरे से बाहर होने पर उन्हें नजदीकी पनावड गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।