अजमेर

नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को 20 वर्ष का कारावास, 49 हजार रुपए जुर्माना

पोक्सो अदालत (संख्या-एक) के न्यायाधीश बन्नालाल जाट ने मंगलवार को सुनाए फैसले में नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त मझेला झाक थाना ब्यावर सदर निवासी फजलुद्दीन काठात को 20 वर्ष के कठोर कारावास व 49 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
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Mar 05, 2024
नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को 20 वर्ष का कारावास, 49 हजार रुपए जुर्माना
नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को 20 वर्ष का कारावास, 49 हजार रुपए जुर्माना

पोक्सो अदालत (संख्या-एक) के न्यायाधीश बन्नालाल जाट ने मंगलवार को सुनाए फैसले में नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त मझेला झाक थाना ब्यावर सदर निवासी फजलुद्दीन काठात को 20 वर्ष के कठोर कारावास व 49 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। पीडिता को पीडित प्रतिकर स्कीम के तहत 6 लाख रूपए अलग से दिलाए जाने के आदेश भी अदालत ने दिए।

प्रकरण के तथ्यपरिवादी ने 29 जनवरी 2022 को पुलिस थाना ब्यावर सदर में रिपोर्ट देकर बताया कि 22 जनवरी 2022 को उसकी नाबालिग पुत्री घर से बिना बताए निकल गई। घर में मिले उसके मोबाइल फोन पर अंतिम बार फजलुद्दीन से बात होना पता चलने पर फजलुद्दीन के विरुद्ध नाबालिग पुत्री को भगा कर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। करीब तीन माह बाद बालिका को दिल्ली से 4 अप्रेल को बरामद कर लिया। बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 376 (2) (एन) भादंसं व 3/4, 5(एल)/6 पोक्सो एक्ट की धारा में अनुसंधान कर अभियुक्त के विरूद्ध चालान पेश किया।पीडि़ता ने घटना की पुष्टि की

पीडिता ने बयानों में बताया कि फजलुद्दीन ने उसे फोन दिलाया और एक-डेढ़ महीन तक बातचीत होती रही। 22 जनवरी को अभियुक्त पीड़िता को डरा-धमकाकर मोटर साईकिल से अजमेर बस स्टैण्ट लेकर आया और दिल्ली ले गया। जहां उसे दो माह दस दिन तक कमरे में रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया।16 गवाह व 29 दस्तावेज पेश

अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक रूपेन्द्र कुमार परिहार ने 16 गवाह तथा 29 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए। घटना के समय पीडिता की आयु 14 वर्ष 10 माह 29 दिन की थी। पुलिस ने आरोपी को 28 सितम्बर 2022 को गिरफ्तार कर लिया। दुष्कर्म की पुष्टि विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त डीएनए व एफएसएल रिपोर्ट से हुई।न्यायालय का मत

न्यायालय ने फैसले में लिखा कि आरोपी फजलुद्दीन 16 वर्ष से कम आयु की नाबालिग पीड़िता को उसके माता-पिता की विधिक संरक्षता से बिना उनकी सहमति के बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया। सदोष परिरोध कर नाबालिग पीडिता से उसकी इच्छा व सहमति के बिना शारीरिक संबंध स्थापित किया जो गंभीर अपराध है। किसी भी प्रकार की नरमी का रुख अख्तियार नहीं किया जा सकता।

Published on:
05 Mar 2024 10:56 pm