अजमेर

आप भी चौंक जाएंगे वजह जानकर, यहां हमेशा दिखाई देता है सूर्यग्रहण

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Aug 01, 2018
Renewable energy
Renewable energy

भूपेंद्र सिंह/अजमेर।
अजमेर विकास प्राधिकरण के अभियंताओं की लापरवाही के कारण प्राधिकरण को जम कर चूना लग रहा है। जहां प्रतिमाह उसे बचत होनी चाहिए वहीं इसके उलट वह लाखों रुपए गंवा रहा है। मामला जुड़ा है प्राधिकरण के 84 किलोवाट के सोलर एनर्जी पावर प्लांट से।

अपनी बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए दो साल पूव सोलर एनर्जी पावर प्लांट लगाया गया था लेकिन यह प्लांट पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा है। इसके चलते प्राधिकरण को प्रतिमाह बिजली के बिल के रूप में टाटा पावर को लाखों रुपए की राशि जमा करवानी पड़ रही है।

इस प्लांट से प्रतिदिन 75 किलोवाट तक बिजली का उत्पादन होता है। यह बिजली विद्युत ग्रिड को भेजी जाती है। प्रतिमाह इस सोलर प्लांट के जरिए जितनी यूनिट बिजली ग्रिड को भेजी जाती है उतनी यूनिट का समायोजन टाटा पावर द्वारा एडीए को जारी किए गए बिजली के बिल में होता है।

सोलर एनर्जी प्लांट बंद होने से एडीए को लाखों रुपए का पूरा बिल भरना पड़ रहा है। जहां जून 2017 में केवल 2 यूनिट का बिल एडीए को भेजा गया वहीं जून 2018 में 19 हजार 926 यूनिट का बिल एडीए को भेजा गया। एडीए ने इसके पेटे 1 लाख 96 हजार 504 रुपए का बिल भरा है। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए एडीए में लगाए गए प्लांट का औचित्य ही नजर नहीं आ रहा है। सिस्टम पर ध्यान नहीं

सोलर प्लांट के पैनल खराब पड़े हैं। इनका नियमित रखरखाव नहीं किया जा रहा है। सोलर पैनल का सॉकिट निकल कर सीढिय़ों पर झूल रहा है लेकिन अभियंताओं की नजर इस पर नहीं पड़ रही है। इसकी बजाय अभियंता लाखों रुपए खर्च कर अफसरों के चैम्बर चमकाने में लगे हुए हैं।

टूटी हुई है अर्थिंग

सोलर प्लांट के लिए एडीए के पार्किग एरिया में भूमिगत अर्थिंग की गई है। लेकिन अर्थिंग प्रतिरोधक ढंग से नहीं होने से अर्थिग सिस्टम खराब है। इससे सोलर पैनल नहीं चल रहा है। एक अर्थिंग तो टूटी ही पड़ी है लेकिन इस पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है।

खाली पड़े हैं अग्निशमन यंत्र

एडीए भवन में फायर फाइटिंग सिस्टम भी नहीं है। आग बुझाने के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र खाली पड़े हैं। हालांकि इन पर पर्चियां चिपकर इनकी वैधता 20 जून 2018 दर्शाई गई है।
सभी को चाहिए एसी की ठंडक

एडीए में नियम कायदे ताक पर रखकर लाखों रुपए खर्च कर सभी कमरों में एसी लगाए गए हैं। इसमें बाबू से लेकर एडीए की पुलिस विंग तक शामिल है जो ठंडी हवा का सुख भोग रहे हैं। कर्मचारी के कमरे हों या अधिकारियों के चैम्बर दिनभर एसी चलते रहते हैं। इससे लाखों रुपए का बिल भरना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल
एडीए ने वर्ष 2016 में 84 किलोवाट का यह प्लांट रील के जरिए लगवाया था। इस पर 45 लाख रुपए खर्च हुए। तीस फीसदी राशि की नवीन एवं नवकरीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा सब्सिडी दी गई। प्लांट की 5 साल तक देखरेख का जिम्मा रील का है। एडीए का कुल विद्युत भार 120 किलोवाट का है। पीक सीजन में एडीए में 90 किलोवाट तक बिजली का उपभोग होता है।

इस मामले को दिखवाते हैं। यदि प्लांट बंद है तो इसे चालू करवाया जाएगा।

-नमित मेहता, कमिश्नर एडीए

Published on:
01 Aug 2018 09:27 am