कांग्रेस फिलहाल प्रदेश स्तर के आला नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी सभाओं में भेजेगी। वहीं राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं।
दिलीप शर्मा/अजमेर।
प्रदेश में आगामी 29 जनवरी को होने वाले दो लोकसभा व एक विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस फिलहाल प्रदेश स्तर के आला नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी सभाओं में भेजेगी।
वहीं राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। लिहाजा भाजपा लोकसभा व विधानसभा उपचुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देख रही है। अन्य राज्यों की तरह भाजपा पीएम नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के भरोसे प्रचार प्रसार करेगी। जबकि कांग्रेस प्रदेश स्तरीय नेताओं के भरोसे ही चुनाव प्रचार में उतरेगी। कांगेस की ओर से फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व अन्य बड़े नेता का नाम स्टार प्रचारक के रूप में सामने नहीं आया है।
यह हैं कांग्र्रेस के खेवनहार
कांग्रेस के प्रचारकों में पूर्व सीएम अशोक गहलोत व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट प्रमुख हैं। इनके साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सी. पी. जोशी, भंवर जितेन्द्र सिंह, डॉ गिरिजा व्यास, विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी, गोविंद डोटासरा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, डॉ चंद्रभान, शांति धारीवाल, महेन्द्र जीत सिंह मालवीय, दुर्रूमियां, पूर्व सांसद अश्क अली टांक, मोहन प्रकाश, देवेन्द्र सिंह यादव, जुबेर खान, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह माने जा रहे हैं।
महिला मतदाताओं पर भी पकड़ का प्रयास
प्रदेश में भाजपा सरकार की मुखिया महिला होने के कारण अब कांग्रेस ने भी अपनी महिला विंग को सक्रिय कर दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव अजमेर का दौरा कर चुकी हैं। उन्होंने यहां प्रदेश अध्यक्ष रेहाना रियाज की मौजूदगी में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चुनाव में बूथ स्तर तक पहुंचने व महिला मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं।
हालाकि महिला कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं की संख्या अपेक्षित कम नजर आई। प्रदेश स्तरीय महिला नेताओं ने स्थानीय पदाधिकारियों का बड़ी सभा के स्थान पर डोर टू डोर मतदाता से चुनाव तक निरंतर संपर्क रखने को कहा है। ताकि मतदान की तिथि के दिन कोई मतदाता अनजान नहीं रहे। अग्रिम संगठनों जैसे युवा कांग्रेस, एनएसयूआई विभिन्न प्रकोष्ठ व विभाग, सेवादल आदि के पदाधिकारियों की टीमें भी विधानसभावार जनसंपर्क करने के निर्देश दिए हैं।
इन मुद्दों पर रहेगा जोर
- राष्ट्रीय मुद्दे- जीएसटी व नोटबंदी
- महंगाई- रसोई गैस व पैट्रोलियम उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी
- रोजगार - रोजगार दिलाने के नाम पर झांसा- ध्रुवीकरण - जाति के आधार पर जनता से संवाद
- विकास - पुरानी परियोजनाओं का श्रेय लेने का प्रयास