Ajmer Hotel Fire Case: राजस्थान के अजमेर स्थित डिग्गी बाजार में 1 मई को हुए होटल नाज अग्निकांड ने एक और ज़िंदगी लील ली है।
Ajmer Hotel Fire Case: राजस्थान के अजमेर स्थित डिग्गी बाजार में 1 मई को हुए होटल नाज अग्निकांड ने एक और ज़िंदगी लील ली है। गुजरात के भावनगर निवासी अल्का गंभीर रूप से झुलस गई थीं, जिसने सोमवार को JLN अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दिल दहला देने वाली घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। मृतकों में एक तीन वर्षीय मासूम बच्चा भी शामिल है।
बता दें, घटना के समय होटल में करीब 18 लोग ठहरे हुए थे, जो अजमेर दरगाह में जियारत के लिए आए थे। आग सुबह 8 बजे लगी और संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में बेहद कठिनाई हुई। धुएं और आग से बचने के लिए दो जायरीन को तीसरी मंज़िल से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी। बता दें, आग इतनी भीषण थी कि बचाव के दौरान कुछ दमकल कर्मी भी धुएं की वजह से बेहोश हो गए। घायलों को तत्काल JLN मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
इस दौरान एक मां ने अपने बच्चे को खिड़की से नीचे फेंककर बचाने की कोशिश की। हादसे में कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनमें से अब तक पांच ने दम तोड़ दिया। बता दें आग इतनी भीषण थी कि बचाव के दौरान कुछ दमकल कर्मी भी धुएं की वजह से बेहोश हो गए। घायलों को तत्काल JLN मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
इस दुखद हादसे के बीच अजमेर दरगाह के खादिमों की संस्था 'अंजुमन सैयद ज़ादगान' ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल पेश की है। संस्था ने हर मृतक के परिजन को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। वहीं, घायलों को 50,000 रुपये की राहत राशि दी। इसके अलावा मुफ़्त एंबुलेंस की व्यवस्था कर शवों को परिजनों तक पहुंचवाया।
अंजुमन के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि धर्म से ऊपर इंसानियत है। चाहे मृतक हिंदू हो या मुसलमान, दुख की इस घड़ी में अंजुमन सबकी मदद करती है।
इस घटना पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने न केवल इस घटना को बेहद दुखद बताया, बल्कि अजमेर शहर में अवैध होटलों और गेस्ट हाउस के संचालन पर भी गंभीर चिंता जताई है।