
अजमेर। सड़क हादसे में चेहरे से लगभग पूरी तरह अलग हुआ निचला जबड़ा…जमीन पर मिट्टी में जाकर गिर गया। परिजन घायल युवक के साथ में चेहरे से अलग हुआ जबड़ा लेकर जेएलएन अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने 5 घंटे तक चली जटिल सर्जरी से उसी जबड़े को फिर मरीज के चेहरे पर जोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार मांसपेशियों समेत चेहरे से लगभग पूरी तरह अलग हो चुके निचले जबड़े को उसी मरीज में वापस स्थापित कर पुनः कार्यशील बनाने की देश और दुनिया की यह पहली सर्जरी मानी जा रही है।
जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि गत 4 सितम्बर की रात उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी निवासी सूफियान किशनगढ़ के पास सड़क हादसे में गम्भीर रूप से घायल होकर अजमेर की जेएलएनएच आपातकालीन इकाई में भर्ती हुआ। दुर्घटना में निचला जबड़ा पूरी तरह उखड़कर अलग हो गया और जमीन पर मिट्टी में सना मिला। परिजन सूफियान व उसके टूटे जबड़े को लेकर आए। मेडिकल की भाषा में नियर टोटल एम्प्यूटेशन ऑफ मैंडिबल कहा जाता है।
सर्जरी की बड़ी चुनौती यह थी कि जबड़े को पकड़ने वाली मूल मांसपेशियां और टिशूज(ऊतक) सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नेपो विद्यार्थी व उनकी टीम ने आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों को जोड़कर पहले जबड़े को दुबारा स्थिर किया। ऊतकों के जरिए जबड़े में रक्तसंचार को विकसित करने का प्रयास किया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविन्द खरे ने बताया कि जबड़ा अलग होने से जीभ पीछे खिसककर सांस की नली बंद कर सकती थी। ऑपरेशन से पहले एयर-वे सुरक्षित करना चुनौती थी। ईएनटी के डॉ. द्विविजय के नेतृत्व में गले में छेद कर एयरवे सुरक्षित किया। फिर एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. दीपिका के सहयोग से मरीज को सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया।
सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नेपो विद्यार्थी ने बताया कि जबड़े को जोड़ने के साथ ऊपरी-निचले दांतों का सही मिलान यानी ऑक्लूजन सुनिश्चित करना अहम था। उन्होंने टीम के साथ जबड़े को उसकी मूल स्थिति में लेकर आए फिर आसपास के ऊतकों से मजबूती से जोड़ा, ताकि भविष्य में मरीज जबड़े को न केवल हिला सके बल्कि भोजन भी चबाकर खा सके। इस सर्जरी में पांच घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। सर्जरी के बाद मरीज स्वस्थ है। शुक्रवार को उसे डिस्चार्ज किया जाएगा।
मा योजना प्रभारी डॉ. अमित यादव ने बताया कि सूफियान अजमेर में उधार ली गई बाइक पर फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका उपचार केन्द्र सरकार की मां योजना में नि:शुल्क किया गया।