अजमेर

सावन का सत्कार…..51 पिल्लरों पर टिका प्राचीन शिवालय, जहां एक साथ विराजते हैं तीन शिवलिंग

Aug 08, 2026
Rajasthan

खण्डार.कस्बे के पुराने मुख्य बाजार में तकिए के कुएं के पास स्थित करीब 500 वर्ष पुराना त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर आज भी अपनी प्राचीन स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन माह में यहां श्रावण महोत्सव के तहत प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, अभिषेक और पूजा-अर्चना के आयोजन हो रहे हैं।

पांच सदियों से आस्था का दीप जला रहा त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार मंदिर का निर्माण खण्डार दुर्ग स्थित तारागढ़ किले के समय तत्कालीन शासकों की ओर से कराया गया था। मंदिर की वास्तुकला रणथम्भौर क्षेत्र की प्राचीन स्थापत्य शैली की झलक प्रस्तुत करती है। करीब 60 गुणा 100 वर्ग फीट क्षेत्र में बने इस मंदिर में पत्थरों पर आकर्षक नक्काशी की गई है। दीवारों और छतों पर फूल-पत्तियों सहित विभिन्न कलाकृतियां उकेरी गई हैं।
ब्रह्मा-विष्णु-महेश के स्वरूप में विराजे तीन शिवलिंग
मंदिर 51 पिल्लरों पर बना हुआ है। गर्भगृह में तीन द्वार हैं, जिनमें मध्य द्वार पर द्वारपाल जय-विजय की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर का करीब 35 फीट ऊंचा शिखर इसकी प्राचीन भव्यता को दर्शाता है। गर्भगृह में एक साथ तीन शिवलिंग स्थापित हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि त्र्यंबकेश्वर महादेव की पूजा करने से तीनों देवों की आराधना का फल प्राप्त होता है।
मंदिर से जुड़े राधारमण सिंहल और रमेश तिवाड़ी ने बताया कि वर्षों पहले कस्बे में बालिका शिक्षा के लिए भवन की कमी होने पर ग्रामीणों ने मंदिर परिसर को कुछ समय के लिए शिक्षा विभाग को सौंप दिया था। इसके बाद यहां राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय संचालित हुआ। वर्ष 2010-11 में विद्यालय के अन्यत्र समायोजन के बाद मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां और अधिक बढ़ गईं। वर्तमान में यहां नियमित हवन, पूजन, अभिषेक और आरती का क्रम जारी है।
पीपल, नीम और बरगद के संयुक्त वृक्ष आकर्षण का केंद्र
मंदिर परिसर में स्थित पीपल, नीम और बरगद के संयुक्त वृक्ष भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। पुजारी पंडित मनोज शर्मा और रमेश मुण्डोतिया के अनुसार तीनों वृक्षों की जड़ें, शाखाएं और टहनियां आपस में जुड़ी हुई हैं। स्थानीय मान्यता है कि इन वृक्षों की पूजा कर 108 परिक्रमा करने से व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सुबह से शाम तक श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर मंदिर और पवित्र वृक्षों की परिक्रमा करते नजर आते हैं। प्राचीन विरासत और धार्मिक आस्था का यह संगम खण्डार की सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है।

Updated on:
08 Aug 2026 06:01 am
Published on:
08 Aug 2026 06:01 am