सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखीअजमेर रोड पर जगह जगह गड्ढे, सुचारू नहीं पानी निकासीएक साल पहले पूरा होना था काम, अब तक पड़ा है अधूरा 6 करोड़ रुपए होंगे खर्च2017 से चल रहा निर्माण1 साल में पूरा होना था काम1.5 किमी सड़क की लम्बाई
ब्यावर. शहर के प्रवेश मार्ग अजमेर रोड की खस्ता हालत वाहन चालकों व राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क पर बने गड्डे व बिखरी पड़ी कंकरीट सहित इन गड्डो में भरे नाले नालियों के गंदे पानी के कारण यहां से आवागमन ही मुश्किल हो गया है। हाइवे पर सरपट दौडऩे वाले वाहन भी जैसे ही शहर में प्रवेश करते है तो इस सड़क पर वाहन सहित सवारियां हिचकोले खाने को मजबूर है। करीब छह करोड़ की लागत से ढ़ाई साल पहले शुरू हुए निर्माण को एक साल में पूरा करना था लेकिन अभी तक भी ये काम अधूरा पड़ा है।
करीब डेढ़ किलोमीटर अजमेर रोड व सतपुलिया विस्तारीकरण के लिए करीब 6 करोड का बजट स्वीकृत हुआ। इस बजट के तहत वर्ष 2017 की शुरूआत में ही काम शुरु हुआ। यह काम एक साल में ही पूरा किया जाना था। करीब ढ़ाई साल से अधिक समय निकल जाने के बावजूद अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। हालात यह है कि बरसात के दौरान जगह जगह गड्डे बन गए। मरम्मत भी की गई लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित रही। जगह जगह कंकरीट बिखरी पड़ी है। पानी निकासी के लिए नालियां सुचारू नहीं है और सड़क पर ही गंदा पानी फैल रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखी का आलम यह है कि न तो काम पूरा किया जा रहा है और न ही सुचारू रूप से मरम्मत की जा रही है। एेसे में बीते ढाई साल से न केवल शहरवासी बल्कि वाहन चालक व राहगीर परेशान है।
सतपुलिया पर सुगम होगा यातायात
सतपुलिया का विस्तारीकरण भी कर दिया गया लेकिन इसे फिलहाल चालु नहीं किया गया है। दोनों ओर बढ़ाई गई चौड़ाई से यातायात सुगम हो सकेगा। मसूदा व अजमेर रोड की तरफ से आने व जाने वाले वाहनों का दबाव सतपुलिया पर है और इसके चौड़ा होने पर दिन में कई बार होने वाले जाम की परेशानी से निजात मिलेगी।
इनका कहना है...
अजमेर रोड का करीब छह करोड़ की लागत से काम हो रहा है। एक साल में पूरा होना था। शुरूआत में पेड़ों की कटाई और बाद में पोल शिफ्टिंग के कारण देरी हुई। अब सीवरेज लाइन के लिए होने वाली खुदाई के कारण देरी हो रही है। फिर भी प्रयास है कि काम जल्दी से पूरा हो ताकि वाहन चालकों पर राहगीरों को परेशानी नहीं हो।
एस.एस.सलूजा, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, ब्यावर