अजमेर और पुष्कर में हैं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की सदियों पुरानी धरोहर। डिजिटल दौर में भी निगरानी के इनकी स्मार्ट तरीके नहीं अपना रहा है विभाग।
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
सदियों पुरानी पुरामहत्व की धरोहरों की निगरानी स्मार्ट तरीके से नहीं हो रही है। हाइटेक और डिजिटल दौर में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अजमेर और पुष्कर की ऐतिहासिक इमारतों पर सीसीटीवी नहीं लगाए हैं। जबकि कई इमारतें-भवन बेहद सघन इलाकों में हैं। इनमें गाहे-बगाहे आसामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी रहता है।
अजमेर में ये हैं धरोहर
अढ़ाई दिन का झौंपड़ा: दरगाह के अंदरकोट इलाके में 12 सौ वर्ष पूर्व निर्मित प्राचीन संस्कृत पाठशाला को अढ़ाई दिन का झौंपड़ा कहा जाता है। इसके आसपास का इलाका बहुत सघन आबादी, दुकानें बन चुकी हैं।
तारागढ़ किला: अरावली की पहाड़ीपर 1033 ईस्वी में गढ़बीठली (तारागढ़) किला बना है। इसके कई हिस्से नष्ट हो चुके हैं। एक ऐतिहासिक गेट, दीवार और अन्य हिस्से ही सुरक्षित हैं।
बादशाही बिल्डिंग: नया बाजार में बादशाही बिल्डिंग बनी है। मुगलकाल में यह दरबारियों का आवास होता था मराठकाल में यहां कचहरी चलती थी।
अब्दुल्ला का मकबरा: 1710 में अब्दुल्ला खां और उसकी पत्नी का संगरमर का मकबरा बना हुआ है। वह मुगल बादशाहर फुर्रखसियार के हाकिम हुसैन अली खां का पिता था।
कोस मीनार: मुगल बादशाह अकबर ने आगरा से अजमेर तक कोस मीनार बनवाई थीं। यह भूणाबाय, जयपुर रोड, एसपी आवास तक बनी हुई हैं। जहांगीर महल: पुष्कर में बादशाह जहांगीर और उसकी पत्नी नूरजहां ने 16 वीं शताब्दी में महल बनवाया था। यहां वे कई बार रुकते थे।
आनासागर बारादरी: मुगल बादशाह जहांगीर और शाहजहां ने संगमरमर पत्थर से आनासागर बारादरी और उद्यान लगाया। यहां खरीददारी के लिए सहेलियों का बाजार भी बना हुआ है।
नहीं होती है स्मार्ट निगरानी
पुरामहत्व की धरोहरों की देखरेख केंद्र सरकार का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है। इसका आनासागर बारादरी पर दफ्तर बना हुआ है। अजमेर दफ्तर जयपुर सर्किल के अन्र्तगत आता है। सदियों पुरानी धरोहरों पर सीसीटीवी नहीं लगे हैं। इनकी निगरानी कर्मचारी ही करते हैं। कई जगह आसामाजिक तत्वों का जमवाड़ा रहता है। वे धरोहरों को नुकसान भी पहुंचाते हैं।
बारादरी और गेटों पर हैं सीसीटीवी
विभाग के अधीन मदार गेट, कोतवाली गेट, ऊसरी गेट, आगरा गेट, देहली गेट, त्रिपोलिया गेट (दरगाह बाजार) भी हैं। इनमें त्रिपोलिया गेट, बारादरी स्थित दफ्तर और कुछ अन्य गेट पर ही सीसीटीवी लगा है।
अकबरी किले में हैं कैमरे
नया बाजार स्थित अकबरी किला राज्य सरकार के राजकीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। विभाग ने इसके प्रवेश द्वार से विभिन्न गैलरी और परिसर में सीसीटीवी लगाए हैं। ताकि आगंतुकों की गतिविधियों पर नजर रहे।
देश में जिन स्मारकों पर टिकट व्यवस्था है, वहां सीसीटीवी लगाने की व्यवस्था हैं। अजमेर में बारादरी और कुछेक जगह कैमरे लगे हैं। अन्य स्मारकों पर कैमरे फिलहाल नहीं हैं।
ओ.पी.मीना, संरक्षण सहायक, एएसआई