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अजमेर.
बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पाली के लॉ कॉलेज को प्रथम वर्ष में प्रवेश की अनुमति दी है। वहीं अजमेर के लॉ कॉलेज का मामला अटका हुआ है।
वर्ष 2005 में प्रदेश में अजमेर, पाली, नागौर, बीकानेर, कोटा, बूंदी सहित अन्य शहरों में लॉ कॉलेज खोले गए। मान्यता नहीं होने के कारण सभी कॉलेज को प्रतिवर्ष बीसीआई से प्रथम वर्ष की मंजूरी लेनी पड़ती है। इस साल भी कमोबेश यही स्थिति है। उधर कौंसिल ने लॉ कॉलेज पाली को सत्र 2018-19 में प्रथम वर्ष में दाखिलों की मंजूरी जारी कर दी है।
प्रवेश अनुमति का इंतजार
लॉ कॉलेज अजमेर में प्रथम वर्ष की 240 सीट है। मौजूदा सत्र के 97 दिन निकल चुके हैं। यहां प्रथम वर्ष में दाखिलों का इंतजार है। हाल में प्राचार्य डॉ. डी. के.सिंह ने दिल्ली जाकर बीसीआई के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की। कॉलेज को जल्द प्रवेश की अनुमति मिलने की उम्मीद है। अलबत्ता राज्य सरकार ने राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित तीन व्याख्याताओं का पदस्थापन भी कर दिया है।
मिलेगी स्थायी मान्यता!
हाल में शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने लॉ कॉलेज में छात्रसंघ कार्यालय का उद्घाटन किया था। उन्होंने सरकार के स्तर बार कौंसिल में फीस और अन्य कार्रवाई पूरी होने के आधार पर जल्द स्थायी मान्यता मिलने की बात कही थी। इस साल विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगने वाली है। इसके बाद वर्ष 2019 में अप्रेल-मई तक लोकसभा चुनाव होंगे। ऐसे में स्थायी मान्यता मिलने में विलम्ब हो सकता है।
मुन्ना की तरह सबको दिखेंगे बापू, यह सपना नहीं हकीकत है साहब
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने नई शुरुआत की है। विश्वविद्यालय में विभागवार होने वाले पत्राचार के नीचे अब राष्ट्रपिता बापू के ‘कथन’ लिखे जाएंगे। यह परम्परा अगले साल तक जारी रहेगी।
राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी की 150 वीं जन्म जयंती मनाई जा रही है। इसके तहत एक साल तक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, गैर सरकारी संगठन और केंद्र/राज्य सरकार के स्तर पर कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय भी इसमें जुड़ गया है। यहां विभागवार जारी होने वाले पत्रचारों में अब गांधीजी के प्रसिद्ध कथन, वाक्य लिखे जाएंगे। कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने इसकी स्वीकृत प्रदान की है।