
अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्याल और इंजीनियरिंग कॉलेज की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। यहां सर्वोच्च पदों की स्थिति ‘पेचीदा’ बनी हुई है। कहीं कुलपति तो कहीं स्थाई प्राचार्य का इंतजार है। संस्थाओं को साल 2019 में कुछ हालात बदलने की उम्मीद है।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में 11 अक्टूबर से कुलपति प्रो. आर .पी. सिंह के कामकाज पर राजस्थान हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। पिछले ढाई महीने से विश्वविद्यालय में अहम कामकाज ठप हैं। यहां दीक्षान्त समारोह, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के बजट का उपयोग सहित कई कार्य अटक गए हैं। राजभवन और सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। कुलसचिव अनिता चौधरी भी बीते कुछ दिनों से बीमार हैं।
इंजीनियरिंग कॉलेज के हाल
राजकीय बॉयज और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में मौजूदा वक्त स्थाई प्राचार्य नहीं है। बॉयज कॉलेज में तो वर्ष 2015 से स्थाई प्राचार्य पद रिक्त है। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रो. रंजन माहेश्वरी मई 2017 से कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में डॉ. अजयसिंह जेठू इस्तीफा देकर वापस मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में जा चुके हैं। यहां भी फिलहाल प्रो. माहेश्वरी अस्थाई जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। दोनों कॉलेज में स्थाई प्राचार्य का इंतजार है।
13 साल से स्थाई प्राचार्य नहीं....
प्रदेश के किसी राजकीय लॉ कॉलेज में 13 साल से स्थाई प्राचार्य नहीं है। प्रदेश में विधि शिक्षकों का पृथक कैडर नहीं होने से यहां समस्या कायम है। साल 2005 से वरिष्ठतम रीडर को ही कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। स्थाई प्राचार्य और संसाधनों की कमी के चलते लॉ कॉलेज को बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता भी नहीं मिल पाई है। इसके चलते प्रतिवर्ष इन्हें प्रथम वर्ष में दाखिलों के लिए परेशान होना पड़ता है।
कब मिलेगा आयोग को सातवां सदस्य
राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष सहित सात सदस्य होने चाहिए। लेकिन पिछले पांच साल से यहां सातवें सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई है। मौजूदा वक्त अध्यक्ष दीपक उप्रेती के अलावा डॉ. आर. डी. सैनी, सुरजीतलाल मीना, के. आर. बगडिय़ा, डॉ. शिवसिंह राठौड़, राजकुमारी गुर्जर और रामूराम राईका सदस्य हैं। सातवें सदस्य का पद छह साल से रिक्त है।