आधुनिक तकनीकी वाले भवन साल 2017 में राज्यपाल कल्याण सिंह ने उद्घाटन किया था।
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
करोड़ों रुपए से निर्मित नए भवन महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में धूल-धूसरित हो रह हैं। यूजीसी और जनता की गाढ़ी कमाई से बने भवन अनुपयोगी हैं। कहीं एमओयू पर हस्ताक्षर को लेकर पेंच तो कहीं अन्य परेशानियां बनी हुई हैं।
विश्वविद्यालय ने बहुउद्देशीय और अत्याधुनिक सुविधाओं युक्त मंगलम भवन बनवाया है। यहां भारतीय स्टेट बैंक (तब एसबीबीजे), फोटो और फैक्स सुविधा, इंटरनेट, पोस्ट ऑफिस, छोटा केफेटेरिया और विद्यार्थियों के रुकने के लिए प्रतीक्षालय बनाया गया। ताकि एक ही छत के नीचे उनका सारा कामकाज हो जाए।
आधुनिक तकनीकी वाले भवन साल 2017 में राज्यपाल कल्याण सिंह ने उद्घाटन किया था। डेढ़ साल से भारतीय स्टेट बैंक यहां स्थानांतरित नहीं हो पाया है। पहले किराएनामे को लेकर विलंब हुआ। अब विश्वविद्यालय की तरफ से एमओयू में देरी हो रही है। इसके चलते भवन ताले में बंद पड़ा है।
विक्रम साराभाई भवन भी बेकार
बीते साल 2 अक्टूबर को तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी और प्रो. नरेश दाधीच ने विक्रम साराभाई भवन का लोकार्पण किया था। यह भवन आठ महीने से खाली पड़ा है। इसमें रिमोट सेंसिंग विभाग को स्थानांतरित किया जाना है। लेकिन यह काम नहीं हो पाया है। विभाग अब तक महर्षि वाल्मीकि सामाजिक विज्ञान भवन में ही संचालित है।
कई भवन हुए बदहाल
विश्वविद्यालय की अनदेखी से कई भवन बदहाल हो चुके हैं। इनके निर्माण में सरकार, यूजीसी और जनता की गाढ़ी कमाई लगी है। इनमें स्टाफ कॉलोनी के निकट बने परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव के क्वार्टर, शोधार्थियों के लिए बना याज्ञवलक्य भवन और बुक वल्र्ड, डेयरी पार्लर कियोस्क शामिल है। विक्रमादित्य भवन के पीछे बना उद्यमिता एवं कौशल विकास केंद्र का छात्रावास चार-पांच से बंद है। यहां कॉमर्स विभाग के लिए पूर्व में प्रस्तावित महर्षि वशिष्ठ भवन अधूरा पड़ा है।