
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
वन विभाग वैशाख पूर्णिमा यानि 7 मई को सालाना वन्य जीव गणना कराएगा। हालांकि 3 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन जारी है। इसके चलते विभाग को तैयारियों और वनकर्मियों की ड्यूटी लगाने में काफी ऐहतियात बरतनी पड़ेगी। स्थिति सामान्य नहीं हुई तो गणना स्थगित भी करनी पड़ सकती है।
वन विभाग प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा पर अजमेर, किशनगढ़, टॉडगढ़, जवाजा ब्यावर, शोकलिया, पुष्कर और अन्य क्षेत्रों में वन्य जीव की गणना करता है। इनमें पैंथर, सियार, लोमड़ी, साही, हिरण, खरगोश, अजगर, बारासिंगा और अन्य वन्य जीव शामिल होते हैं। वन्य जीव की गणना के लिए वनकर्मी विभिन्न क्षेत्रों में मचान बांधकर वन्य जीव की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इस बार भी 7 मई को वैशाख पूर्णिमा की रात्रि में वन्य जीव गणना होगी।
यह थी पिछड़ा गणना की स्थिति
नीलगाय (रोझड़ा)-3 हजार, लंगूर-1 हजार , पैंगोलिन नेवला-200, जंगली सूअर-100, मोर-3 हजार, सियार-गीदड़-450। पिछले साल राजगढ़ इलाके में शावक के साथ मादा पैंथर भी दिखाई दी थी। जिले में बाघ, चिंकारा, चीतल, सारस, मछुआरा बिल्ली, गिद्ध, उडऩ गिलहरी, काला हरिण, जंगली मुर्गा, चौसिंगा विलुप्त हो चुके हैं।
गोडावण हुए नदारद
जिले के शोकलिया वन्य क्षेत्र से गोडावण नदारद हो चुके हैं। पिछले कई साल से वन विभाग को यहां गोडावण नहीं मिले हैं। 2001 की गणना में यहां 33 गोडावण थे। 2002 में 52, 2004 में 32 गोडावण मिले। इसके बाद यह सिलसिला घटता चला गया। पिछले पांच साल में यहां एक भी गोडावण नहीं मिले हैं। खरमोर पर भी संकट है। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की रिपोर्ट की मानें तो 80 के दशक तक देश में करीब 4374 खरमौर थे। अब यह संख्या 1 हजार से भी कम है। अजमेर जिले में सोकलिया, गोयला, रामसर, मांगलियावास और केकड़ी खरमौर के पसंदीदा क्षेत्र है।
इस बार 7 मई को वैशाख पूर्णिमा है। लॉक डाउन 3 मई तक चलेगा। इसके बाद स्थिति के अनुसार वन्य जीव गणना कराई जाएगी।
सुदीप कौर, उप वन संरक्षक वन विभाग