होनी हैं जेईई मेन, जेईई एडवांस और अन्य परीक्षाएं।
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
कोरोना संक्रमण देश के आईआईटी, एनआईटी, मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य संस्थानों की परेशानी बढ़ाएगा। दरअसल जेईई मेन, जेईई एडवांस, नीट, क्लेट और अन्य परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटने के आसार हैं। ऐसे में संस्थानों को रिक्त सीट भरने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ सकती है।
देश में आईआईटी में दाखिलों के लिए जेईई एडवांस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और राज्यों के इंजीनियरिंग कालेज में प्रवेश के लिए जेईई मेन, मेडिकल-डेंटल कॉलेज में प्रवेश के लिए नीट और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लिए क्लैट परीक्षा होनी है।
ये होनी हैं देश में प्रवेश परीक्षाएं
जेईई मेन द्वितीय चरण: मई अंत अथवा जून में प्रस्तावित
नीट-मई अंत अथवा जून में प्रस्तावित
जेईई एडवांस-मई अंत अथवा जून में प्रस्तावित
क्लैट-24 मई को
नेशनल कौंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट टेस्ट-मई में प्रस्तावित
लाखों विद्यार्थियों ने किए हैं आवेदन
नीट, जेईई मेन द्वितीय चरण, क्लैट, जेईई एडवांस, होटल मैनेजमेंट टेस्ट के लिए लाखों विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। इनमें पास होने वाले विद्यार्थी बी.टेक, बी.आर्किटेक्ट, बी. प्लानिंग, एमबीबीएस, बीडीएस, फाइव ईयर इंटीग्रेटेड लॉ और अन्य कोर्स में प्रवेश लेंगे।
देश में ये हैं प्रमुख कोर्स की सीट
इंजीनियरिंग-27 लाख (आईआईटी, एनआईटी, राज्यों के इंजीनियरिंग और डिप्लोमा कॉलेज)
मेडिकल-1.5 लाख, डेंटल-1 लाख
मैनेजमेंट-92, 928 (आईआईएम और राज्यों के मैनेजमेंट कॉलेज)
लॉ-5 लाख 20 हजार (एनएलयू, केंद्रीय/राज्य स्तरीय विवि और कॉलेज)
कितने विद्यार्थी बैठेंगे इस पर नजर...
जनवरी में आयोजित जेईई मेन प्रथम चरण में 12 लाख विद्यार्थी बैठे थे। द्वितीय चरण में भी 12 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। जेईई एडवांस में 2.44 लाख, क्लैट के लिए करीब 1.5 लाख, नीट के लिए 15 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोटा, मुंबई जैसे कई शहर हॉट स्पॉट बने हुए हैं। लिहाजा परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, आईआईटी और अन्य संस्थानों की नजरें रहेंगी।
यूं दिए जाते हैं सीधे प्रवेश...
इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, पॉलीटेक्निक, आईआईटी, एनआईटी संस्थान प्रतिवर्ष सीट खाली होने पर सूचना/विज्ञापन जारी कर विद्यार्थियों को सीधे प्रवेश देते हैं। इसमें प्रवेश परीक्षाओं के अलावा उनके बारहवीं के अंकों-वरीयता जैसे पैमाने होते हैं।
जेईई मेन, जेईई एडवांस और अन्य परीक्षाओं में कितने विद्यार्थी बैठते हैं यह अहम हैं। आईआईटी में तो सीट भरने में दिक्कत नहीं होती। देश के कई संस्थानों में प्रतिवर्ष सीट सीधे प्रवेश से भरी जाती हैं। अलबत्ता यह फार्मूला इस बार दो-तीन बार अपनाना पड़ सकता है।
प्रो. एस. पी. हर्षा, मैकेनिकल विभाग आईआईटी रुडक़ी
कितने विद्यार्थी प्रवेश परीक्षाओं में बैठेंगे यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इंजीनियरिंग और पीजी कोर्स में खाली सीट रहने पर सीधे प्रवेश देने ही पड़ेंगे।
प्रो. पी.सी.त्रिवेदी, कुलपति जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी