अजमेर

Corruption: बीएड में 50 सीट स्वीकृत, दिलवाए सौ विद्यार्थियों को दाखिले!

सबसे मजेदार यह है कि यूनिवर्सिटी ने कारगुजारी पता चलनेे के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

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Jan 21, 2022
mdsu ajmer
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अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में गंभीर कारनामा हुआ। बीएड पाठ्यक्रम में सौ सीट पर प्रवेश दिए गए।। जबकि एनसीटीई से 50 सीट स्वीकृत हैं। यूनिवर्सिटी ने कारगुजारी पता चलनेे के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
7 सितंबर 2020 को पूर्व कुलपति रामपालसिंह और उसके दलाल रणजीत को एसीबी ने 2.20 लाख रुपए की रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया था। कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनवानेे, सीट अभिवृद्धि करने की एवज में नेटवर्क चला रहे थे।

100 सीट पर कराए दाखिले

विवि में दा वर्षीय बीएड कोर्स संचालित है। इसमें एनसीटीई ने 50 सीट स्वीकृत की हैं। पीटीईटी कराने वाली नोडल एजेंसी कोर्स में विद्यार्थी अलॉट करती है। लेकिन पूर्व कुलपति रामपाल सिंह के कार्यकाल में करीब सौ सीट पर दाखिले हो गए। ऐसा मौखिक या लिखित आदेश पर हुआ इसको लेकर विवि ने चुप्पी साध ली।

खुद कुलपति ने ढूंढा मामला..

यह मामला अंदरूनी स्तर पर यूं दबा ही रह जाता। लेकिन कुलपति प्रो. शुक्ला ने पिछले दिनों यह मामला ढूंढ निकाला। उन्होंने कुछ शिक्षकों-अधिकारियों से अनौपचारिक बातचीत में इसे एकेडेमिक क्राइम भी कह दिया। लेकिन जांच अभी तक नहीं कराई गई है।

कोई नहीं बढ़ा सकता एक भी सीट...
नियमानुसार एनसीटीई, एआईसीटीई, सीमेट अथवा अन्य एजेंसियों से संस्थानों को बीएड, इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और अन्य केंद्रीयकृत/राज्य स्तरीय पाठ्यक्रमों में सीटें स्वीकृत होती हैं। संबंधित कॉलेज/विवि एक भी सीट से बढ़ाने अथवा ज्यादा प्रवेश नहीं दे सकते हैं। किसी संस्थान द्वारा बगैर मंजूरी/स्वीकृति के सीट बढ़ाना-दाखिला देना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

ज्यादा प्रवेश देेने का मामला पूर्व कुलपति रामपालसिंह के कार्यकाल का बताया गया है। इसके लिए एनसीटीई, एकेडेमिक कौंसिल, बॉम से मंजूरी-आदेश लिया गया या नहीं पहले इसकी जानकारी लेंगे। इसके बाद ही कोई एक्शन लिया जा सकेगा।
प्रो. अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति मदस िववि

Updated on:
20 Jan 2022 06:16 pm
Published on:
21 Jan 2022 08:00 am