
अजमेर
सेवानिवृत कर्मचारियों का लाखों रुपए का बकाया परिलाभ नहीं देने के मामले में अदालत के आदेश पर सोमवार को तहसीलदार ने राजस्थान पथ परिवहन निगम अजमेरू आगार की पांच बसों को कुर्क कर लिया। तहसीलदार आेम प्रकाश सोनी ने उपखंड अधिकारी के आदेश के बाद एलआर एक्ट में दर्ज प्रकरण में कार्रवाई करते हुए अजमेरू आगार की कार्यशाला पहुंच कर पांच बसों को कुर्की की।
कुर्क होने की कार्रवाही पहली बार
जल्द ही तीनों सेवानिवृत कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं होने पर इन बसों को नीलाम कर राशि कर्मचारियों को दी जाएगी। अजयमेरू आगार के इतिहास में रोडवेज बसें कुर्क होने की कार्रवाही पहली बार हुई है। लेबर कोर्ट के आदेश पर 2 अगस्त को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम रोडवेज बस स्टैंड पर अजमेर, अजयमेरू तथा सीबीएस आगार के खाते कुर्क करने पहुंची थी। उस दौरान अजयमेरू आगार के मुख्य प्रबन्ध ने भुगतान के लिए 10 तारिख तक की मोहलत मांगी थी लेकिन पिछले सप्ताह समय सीमा निकलने के बाद भी सेवानिवृत्व कर्मचारियों को भुगतान नहीं मिला।
इन कर्मचारियों का है बकाया
अजयमेरू आगार के सेवा निवृत परिचालक भंवर सिंह चाहडोत के 6 लाख 78 हजार 881 व 10 अप्रेल 2017 से 9 प्रतिशत ब्याज, सेवानिवृत मकैनिक अमर कुमार शर्मा के 11 लाख 98 हजार 223 तथा 10 अप्रेल 2017 से 9 प्रतिशत ब्याज, सेवानिवृत पचिालक अर्जुन सिंह राठौड़ के 10 लाख 19 हजार 726 रुपए तथा 13 अक्टूबर 216 से 9 प्रतिशत ब्याज का बकाया परिलाभ दिलाने के लिए लेबर कोर्ट आदेश दे चुकी है। लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ।
ब्याज राशि रोडवेज ने नहीं दी
बकाया भुगतान नहीं मिलने के बाद मकैनिक अमर कुमार शर्मा बकाया वसूली के लिए तहसीलदार के साथ अजयमेरू आगार तथा कार्यशाला पहुंचे। मृतक आश्रित विधवा कैला देवी तथा गणपत सिंह का बकाया भुगतान तो कर दिया लेकिन तीन साल की ब्याज राशि रोडवेज ने नहीं दी। कर्मचारियों का कहना है कि अपने खाते सीज होने से बचाने के लिए अन्य बैंकों में नए खाते खुलवाए गए हैं।
बकाया नहीं दिलवाया जा सकता
बसों को कुर्क करने के बाद इन्हें अजमेर आगार की कार्यशाला में एक जगह पर खड़ी करवाते हुए मैनेजर ट्रैफिक मोहन लाल शर्मा को सुपुर्द कर दिया गया। बसें कुर्क होते ही रोडवेज प्रबन्धन में हड़कम्प मच गया। हालांकि इन बसों की यदि नीलामी भी कर दी जाए तो सेवानिवृत कर्मचारियों को उनका बकाया नहीं दिलवाया जा सकता।