अजमेर

यूनिवर्सिटी पर मंडराया जबरदस्त संकट, नहीं मिल सकेगी अप्रेल से Salary

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Feb 27, 2019
salary problem in mdsu
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अजमेर. कुलपति के कामकाज पर लगी रोक महर्षि दयांनद सरस्वती विश्वविद्यालय का संकट लगातार बढ़ा रही है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए लेखानुदान अब तक पारित नहीं हुआ है। अगले महीने तक यह काम नहीं हुआ तो अप्रेल से विश्वविद्यालय में वेतन-भत्ते देने में मुश्किलें हो सकती है।

विश्वविद्यालय में प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए लेखानुदान पारित किया जाता है। लेखानुदान में संभावित परीक्षात्मक आय, वेतन-भत्ते, विभिन्न मद में खर्चे शामिल होते हैं। इसके लिए कुलपति ही अधिकृत होते हैं। उनकी अध्यक्षता में वित्त विभाग लेखानुदान पारित कर सरकार को भेजता है। सरकार बजट फाइनेंस कमेटी में लेखानुदान की समीक्षा करती है। कमेटी यथावत अथवा आंशिक परिवर्तन कर इसे पारित करती है।

कुलपति के बगैर मुश्किलें

कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के कामकाज पर बीते वर्ष 11 अक्टूबर से राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। यह रोक अब तक जारी है। नियमानुसार कुलपति ही वित्त वर्ष 2019-20 का लेखानुदान पारित करने के लिए अधिकृत हैं। उनके अलावा विश्वविद्यालय में कुलसचिव और किसी अफसर को यह अधिकार नहीं है।

मार्च तक स्वीकृत है बजट
मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 का लेखानुदान पिछले साल जनवरी-फरवरी में ही पारित किया गया था। इसकी अवधि 31 मार्च तक है। 1 अप्रेल से नया वित्त वर्ष प्रारंभ होगा। ऐसे में विश्वविद्यालय को वेतन-भत्ते चुकाने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मालूम हो विश्वविद्यालय को सरकार से सालाना 3 करोड़ 60 लाख रुपए ही अनुदान मिलता है।

अनुदान कम, वेतन-भत्ते ज्यादा

शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, सेवानिवृत्त कार्मिकों की पैंशन के रूप में विश्वविद्यालय को प्रतिमाह दो करोड़ रुपए देने होते हैं। पूर्व में आयोजित पीटीईटी, बीएसटीसी, आरपीएमटी, पीसीपीएमटी और अन्य परीक्षाओं से हुई आय विश्वविद्यालय की भविष्य निधि के रूप में संचित है। इसके चलते उसका कामकाज चल रहा है। सरकार से अनुदान भी नियमित नहीं मिल पाता है। कई बार सरकार विश्वविद्यालय के अनुदान को रोक चुकी है।

न शोध साक्षात्कार न छात्रवृत्ति
विश्वविद्यालय के शोधार्थियों-विद्यार्थियों के समक्ष भी संकट मंडराया हुआ है। कई शोधार्थियों की पीएचडी थीसिस जमा हो चुकी है। लेकिन कुलपति की गैर मौजूदगी से उनके वाइवा (साक्षात्कार) अटक गए हैं। कई विभागों में छात्रवृत्तियां भी अटकी हुई हैं।

Published on:
27 Feb 2019 06:32 am