अजमेर

बढ़ जाती है उनके दिल की धड़कन, कहीं टूट ना जाए मासूम निगाहों के सपने

बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हमें संस्कृति, मूल्य, पर्यावरण और परस्पर मित्रता को बनाए रखना होगा।

2 min read
Oct 15, 2017
annual function of mayo girls school

मेयो कॉलेज गल्र्स स्कूल के वार्षिकोत्सव के तहत रविवार को पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। महात्मा गांधी इन्टरनेशनल स्कूल के निदेशक डॉ. पास्कल शेजॉट ने कहा कि दुनिया भर में बढ़ती चुनौतियों को देखकर कभी-कभी दिल धड़कने लगता है।

दुनिया का रूप तेजी से बदल रहा है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हमें संस्कृति, मूल्य, पर्यावरण और परस्पर मित्रता को बनाए रखना होगा। डॉ. शेजॉट ने इस दौरान होनहार छात्राओं को पुरस्कार भी बांटी

डॉ. शेजॉट ने कहा कि महात्मा गांधी और स्टीवन स्पीलबर्ग बेहद साधारण घरों से ताल्लुक रखते थे। लेकिन अपने अडिग इरादों, मूल्यों और मानव कल्याण की भावना से दोनों को आज दुनिया जानती है। गांधीजी अहिंसा के पुजारी के रूप में विख्यात हैं, तो स्पीलबर्ग जुरासिक पार्क जैसी मशहूर फिल्म बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं। दुनिया में पिछले 40 साल में तेजी से वन्य जीव और पर्यावरण खराब हो रहा है।

हमें युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए इन्हें बचाना होगा। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूख, आतंकवाद, गरीबी और चौतरफा प्रतिस्पर्धा के माहौल में युवाओं को खुद को तैयार करने की जरूरत है। प्राचार्य कंचन खांडके ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की। समारोह में केंद्रीय मंत्री उमा भारती , मेयो कॉलेज गवर्निंग कौंसिल के अध्यक्ष बृजराज सिंह और अन्य मौजूद रहे।

हॉर्स शो का आयोजन
शो में बेटियों ने शानदार करतब दिखाकर अपनी प्रतिभा दिखाई। छात्राओं ने प्रशिक्षित और व्यावसायिक खिलाडिय़ों की तरह शो जम्पिंग दिखाई। तेज गति से घोड़े दौड़ाकर भाले से लकड़ी के टेंट उठाए। छात्राओं ने घोड़ों पर उलटा बैठने, चारों और घूमने, दौड़कर पीठ पर चढऩे, पैर छूने जैसे करतब दिखाकर तालियां बटोरी। बॉल इन बकेट और माउन्टेड पीटी भी शानदार रही। क्रॉस बार वॉल, पोल बेंडिंग, फैंस पोल और अन्य प्रतियोगिताएं सराहनीय रही। वेलोसिटी, प्रिंस, चेतक, ड्यूक और अन्य घोड़ों ने छात्राओं का बखूबी साथ दिया। मुख्य अतिथि पोलो खिलाड़ी समीर सुहाग ने शो जम्पिंग का शुभारंभ किया। उन्होंने छात्राओं को प्रतिभाशाली बताया। प्राचार्य कंचन खांडके ने धन्यवाद दिया।

दिखाया शिक्षा का आईना

नाटक लुकिंग फॉर मेटिल्डा का मंचन शानदार रहा। छात्राओं द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक में शिक्षा की वास्तविकता दिखाई गई। एक तरफ बेटियों-महिलाओं के पब्लिक स्कूल, कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पढऩा, अच्छी नौकरी-व्यवसाय करने की झलक दिखी। दूसरी ओर गरीबी और पारिवारिक माहौल के चलते कई बच्चों के मनमाफिक शिक्षा ग्रहण नहीं करने, जिंदगी के सीमित अवसरों और मजबूरियों को उजागर किया गया। छात्राओं ने नाटक में प्रत्येक पक्ष को अभिनय के माध्मय से बखूबी पेश किया।

Published on:
15 Oct 2017 03:35 pm
Also Read
View All