अजमेर

Pride of Aajmer: अजमेर में पहला बिजली का कनेक्शन, रुके थे हैदराबाद के निजाम

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Oct 25, 2018
Lodha family

अजमेर.

अगर आपको अजमेर की पारम्परिक विरासत, स्वर्णिम इतिहास और वैभव से रूबरू होना है, तो शहर के लोढा परिवार को जाने बगैर यह असंभव है। करीब दो सौ वर्ष पुरानी परिवार की विभिन्न पीढिय़ों के योगदान, पहनावे, जीवनचर्या, खान-पान और मेहमानवाजी से जुड़ी स्मृतियों को एक खूबसूरत किताब में पिरोना आसान नहीं है। लेकिन यह लोढा परिवार की बेटियों-युवा पीढ़ी ने बखूबी अंजाम दिया है।

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उमराव मल-उम्मेद मल, सौभागमल, सम्पतमल लोढा और उनका परिवार अजमेर और पूरे भारत में नामचीन है। व्यवसाय जगत के अलावा परिवार सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणीय रहा है। लोढा परिवार ने अजमेर को स्वर्णिम अतीत से लेकर ब्रिटिशकालीन शासन, परकोटे से आधुनिक शहर बनते देखा है। सही मायनों में इस परिवार को समझे बगैर शहर और तत्कालीन मेरवाड़ा प्रांत की परम्पराएं, रीति-रिवाज, धन-ऐश्वर्य, वक्त के साथ विकास और संस्कृति को आप नहीं जान सकते हैं। लोढा लेगेसी बुक यह सब पढऩे-जानने का अवसर देगी। इसे मुख्यत: पुष्पा लोढा, तृप्ति जैन, स्मृति मेहता, नमृता चौकसी, प्रेरणा सेठिया और अन्य ने करीब पांच साल की अथक मेहनत के बाद तैयार किया है।

बिजली वाला कमरा...

1928 में द अजमेर इलेक्ट्रिक सप्लाई कम्पनी लिमिटेड ने शहर का पहला बिजली कनेक्शन लोढा परिवार को जारी दिया था। नया बाजार स्थित लोढा हवेली में जिस कमरे का विद्युतिकरण हुआ उसे बिजली वाला कमरा कहा जाता है। इसमें 90 साल पुराने बिजली के तार अब तक लगे हुए हैं। पुराने जमाने में गांव-शहर के लोग बिजली और उससे जलती लाइट देखने यहां आते थे।

रुके थे हैदराबाद निजाम

19 वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में हैदराबाद के तत्कालीन निजाम उर्स में अजमेर आए थे। वे लोढा हवेली में सात दिन रुके थे। उन्होंने वापस लौटने के बाद अंग्रेजी में लोढा परिवार को शानदार मेहमानवाजी, मारवाड़ी खान-पान और संस्कृति की तारीफ करते हुए पत्र भी लिखा था। परिवार को ब्रिटिश राज में राय बहादुर, दीवान बहादुर की उपाधि भी मिली हुई थी। बाकायदा ब्रिटिशराज में इन उपाधियों के बैज, बेल्ट मिले हुए थे।

बहूमूल्य परिधान-सामग्री

लोढा परिवार मूलत: नागौर जिले से अजमेर आया था। तत्कालीन ब्रिटिश रेलवे और कोषालय की देखरेख यह परिवार करता था। परिवार की महिलाएं शुद्ध स्वर्ण-रजत तारों निर्मित राजस्थानी लहंगा-चुन्नी, पुरुष रत्नजडि़त आभूषण पहनते थे। परिवार के पास कई बेशकीमती सामग्री, सोने-चांदी की डिजाइनदार चप्पल, तलवार, बहूमूल्य धातुओं से निर्मित सामग्री है। यह प्राचीन भारतीय कला, परम्परराएं संस्कृति को दर्शाता है।

केवल नाम से पहुंच जाती थी चिट्टी

लोढा परिवार सदियों से व्यवसाय जगत में प्रतिष्ठित रहा है। ब्रिटिशकालीन भारत से जुड़े चि_ियों पर केवल इनके परिवार और शहर का नाम लिखा होता था। इसके आधार पर ही पत्र सही पते पर पहुंच जाया करते थे।

बनाए कई नायाब भवन

लोढा परिवार ने अजमेर में कई नायाब भवन बनवाए हैं। बजरंगढ़ पहाड़ के निकट आधुनिक सर्किट हाउस भी लोढा परिवार की सम्पत्ति का हिस्सा रहा है। यहां 1888 में फे्रंच पत्रकार क्लीमेंसो सहित 1969-70 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी रुक चुकी हैं। दोनों ने आनासागर और अरावली के मनोरम दृश्य देखकर इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन इमारत बताया था। इसके अलावा लोढा परिवार ने बम्बावाली कोठी, फूस और नहर वाला बंगला, मूर साहब का बंगला, क्रेग साहब का बंगला, पृथ्वीराज मार्ग स्थित लोढा धर्मशाला और अन्य भवन बनवाए।

व्यवसाय जगत में अग्रणीय

लोढा परिवार व्यवसाय जगत अग्रणीय रहा है। परिवार की ब्यावर में कॉटन मिल्स थी। इसके अलावा सोभामल लोढा ने 1935 में भीलवाड़ा में मेवाड़ टेक्सटाइल मिल स्थापित की थी। जेआरडी टाटा ने करीब 70 साल पहले परिवार को टाटा मोटर्स की एजेंसी दी थी। इसे अब परिवार के सतीश लोढा संभाले हुए हैं। ब्रिटिशकाल में रेलवे और कोषालय का कामकाज संभालने के कारण परिवार का भारत के विभिन्न शहरों में भी आना-जाना रहा।

परम्परा-आधुनिकता का सम्मिश्रण

लोढा परिवार की महिलाओं ने परम्पराओं के साथ आधुनिकता को भी अपनाया। पचास और साठ के दशक में महिलाएं पर्स, साड़ी और मोतियों-सोने-चांदी के गहने पहनती थी। मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी सहित कई पुराने नायक-नायिकाएं लोढा परिवार के मेहमान बन चुके हैं। (स्त्रोत: लोढा लेगेसी बुक)

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Published on:
25 Oct 2018 08:51 am
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