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इस वजह से राजस्थान में नहीं रुकना चाहते स्टूडेंट्स, आखिर कैसे रोक पाएंगे आप

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 17 Oct 2018, 7:22 AM IST

new courses of engineering

new courses of engineering

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

औद्योगिक मांग के अनुसार तकनीकी संस्थानों में विद्यार्थी तैयार नहीं हो रहे हैं। महज तीस फीसदी विद्यार्थियों को मुश्किल से रोजगार मिल रहा है। इससे वाकिफ होने के बावजूद प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज कई नए पाठ्यक्रमों से कोसों दूर हैं।

रोजगार की अच्छे अवसरों के बावजूद इनमें बरसों से पारम्परिक कोर्स संचालित हैं। इसके विपरीत दक्षिण भारत और अन्य प्रदेश आगे हैं। इसके चलते प्रदेश के युवाओं का दूसरे राज्यों में पलायन हो रहा है।

प्रदेश में सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में करीब 50 हजार सीट हैं। विद्यार्थी इन कॉलेज में जेईई मेन्स के जरिए प्रवेश लेते हैं। ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेज नए कोर्स के मामलों में केरल, तमिलनाडु, सीमांध्र और कर्नाटक के विभिन्न कॉलेज से पिछड़े हैं।

दक्षिण भारतीय प्रदेशों में कई इंजीनियरिंग कोर्स हैं जिनमें डिग्री लेकर विद्यार्थियों ने सरकारी नौकरी के अलावा खुद का उद्यम स्थापित किए हैं। राजस्थान के कई इंजीनियरिंग कोर्स भी रोजगारोन्मुखी हैं। इसके बावजूद यहां मांग के अनुरूप नए कोर्स-ब्रांच खोलने की रुचि कम है।

दूसरे राज्यों में यह कोर्स प्रमुख

नैनो टेक्नोलॉजी, सोलर एनर्जी, एन्वायरमेंट इन्फॉरमेटिक्स, कॉमर्शियल प्रेक्टिस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन एन्ड बिजनेस मैनेजमेंट, इंस्ट्रूमेंट टेक्नोलॉजी, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग टूल एन्ड डाई, फिशरीज टेक्नोलॉजी, प्रोस्थेटिक्स एन्ड ऑर्थेटिक्स, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, मेटेलर्जिकल इंजीनियरिंग, सैंडविच मेकेनिक्स, पॉलीमर टेक्नोलॉजी, ग्रीन केमिस्ट्री एन्ड इंजीनियरिंगराजस्थान में सिर्फ यह कोर्ससिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन, कम्प्यूटर, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, पेट्रो केमिकल, प्रोडक्शन इंडस्ट्री और अन्य।

नई ब्रांच और कोर्स में रुचि कम

राजस्थान में तकनीकी शिक्षा विभाग की इंजीनियरिंग कॉलेज में नई ब्रांच और कोर्स खोलने में रुचि कम है। बीते 15-20 वर्षों में यहां कई सरकारी और निजी कॉलेज खुले हैं। मांग के अनुरूप नई ब्रांच और कोर्स और भी शुरू हुए हैं। लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यह काफी कम हैं। विद्यार्थियों को चिरपरिचित ब्रांच और कोर्स में ही दाखिलों का विकल्प मिलता है। नए और रोजगारोन्मुखी कोर्स में प्रवेश के लिए विद्यार्थी दूसरे राज्यों में जा रहे हैं।

ना एक्रिडेशन ना प्रोफेसर

राज्य के नए इंजीनियरिंग कॉलेज के न एक्रिडेशन हैं न इनमें प्रोफेसर हैं। जबकि उच्च और तकनीकी विश्वविद्यालयों के लिए नैक और नैब (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन) से ग्रेडिंग जरूरी है। हालांकि 2020 से नैब ने सभी संस्थाओं के लिए ग्रेडिंग लेना अनिवार्य कर दिया है।