
पुष्कर वास्तव में दुनिया में अनूठा है। यहां देशी श्रद्धालुओं की तो हजारों साल से आवक हो रही है। विदेशी सैलानी भी सनातनी संस्कृति में डूब जाते हैं। यहां स्पेन की विक्टोरिया, ट्रिविया, फ्रांस के मारियो, सैंड्रा जैसे कई पर्यटक हैं, जो कई वर्षों से भारत और विशेषकर पुष्कर आ रहे हैं। कई विदेशी पर्यटक यहां पौराणिक काल की प्रार्थनाएं और वेदमंत्र बोलना सीखते हैं। पुष्कर उनके लिए आध्यात्मिक शांति और सनातन संस्कृति को समझने का सबसे बढिय़ा जरिया है।
यूं तो पुष्कर में साल भर ही विदेशियों की आवक-जावक चलती है लेकिन कार्तिक माह में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही सही मायने में सर्वाधिक होती है। खासतौर पर पुष्कर मेला उनके आकर्षण का केंद्र है। इस दौरान उन्हें प्राचीन भारतीय संस्कृति से रूबरू होने के साथ-साथ ठेठ राजस्थान के ग्रामीण जीवन को समझने का अवसर मिलता है। यही वजह है, कि वे विदेशियों की भारत आने पर सबसे पहली पसंद पुष्कर जाना रहती है।
सीखे वेदमंत्र और प्रार्थनाएं
स्पेन की विक्टोरिया, ट्रिविया, इजरायल के आंद्रेज जैसे कई पर्यटक हैं, जो पुष्कर में विभिन्न आश्रम में रहकर वेदमंत्र और प्रार्थनाएं सीख रहे हैं। उन्हें पुष्कर में आकर अनूठा सुकून मिलता है। इनके अलावा कई विदेशी पर्यटक वेदों का अध्ययन और शोध करने पुष्कर आते रहते हैं। पुष्कर में प्राचीन भारतीय संस्कृति, पौराणिक इतिहास, देवी-देवताओं के मंदिरों को जानने-समझने का अवसर मिलता है।
महर्षि दयानंद भी रहे पुष्कर में
महर्षि दयानंद सरस्वती ने भी पुष्कर में रहकर वेदों का सरल भाषा में अनुवाद किया था। प्रजापिता ब्रह्मा के मंदिर में बने कक्ष में रहकर उन्होंने वेदों का भाष्य तैयार किया था। यह एक तरह से वेदों का सरल भाषा में अनुवाद था। मालूम हो कि महर्षि दयानंद का अजमेर की भिनाय कोठी में ही देहान्त हुआ था।
सभी धर्मों के आश्रम-धर्मशाला
पुष्कर में करीब हिन्दू धर्म से संबंधित सभी जाति-संप्रदाय से जुड़े आश्रम और धर्मशालाएं बनी हुई हैं। यहां विभिन्न सम्प्रदाय के मंदिर भी हैं। साल भर तक लोग धर्मशालाओं और मंदिरों में रुककर धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। यहां कई कथावाचक, संतों के आश्रम भी हैं। कथावाचक मुरारी बापू का भी चित्रकूट धाम के नाम से आश्रम बना हुआ है।
सरोवर के किनारे 52 घाट
पवित्र पुष्कर सरोवर के किनारे 52 घाट बने हुए हैं। यह विभिन्न सम्प्रदाय, राजा-महाराजा और धार्मिक संस्थाओं ने बनवाए हैं। इनमें वराह घाट, गऊ घाट, जयपुर घाट, ग्वालियर घाट, गांधी घाट, ब्रह्म घाट और अन्य प्रमुख हैं। समय के साथ सरोवर में पानी का स्तर भले कम हो गया लेकिन पुष्कर के कई बुजुर्गों ने कभी घाटों की पहली सीढ़ी तक पानी भरा देखा है। यह स्थिति 50 से 60 के दशक के दौरान रही है।
आप यूं पहुंच सकते हैं पुष्कर.......
-राजस्थान के सभी शहरों से रोडवेज और निजी ट्रेवल बस का संचालन
-भारत के विभिन्न प्रांतों से अजमेर तक ट्रेन उपलब्ध
-अजमेर से पुष्कर तक लोकल ट्रेन से पहुंचा जा सकता है
-नए बने किशनगढ़ एयरपोर्ट पर दिल्ली से जूम एयर लाइन्स की फ्लाइट
-कार, जीप, ट्रेवलर्स, दोपहिया वाहन से पुष्कर घाटी, माकड़वाली-होकरा रूट