
Food Security Scheme : फाइल फोटो पत्रिका
मनीष कुमार सिंह
अजमेर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) में मुफ्त खाद्यान्न प्राप्त करने वाले परिवारों की पात्रता अब जांच के दायरे में आ गई है। पक्के मकान अन्य सुविधाओं के बावजूद योजना का लाभ उठाने की आशंका के बीच राज्य सरकार ने अधिक लाभार्थी संख्या वाले वार्डों में सर्वे शुरू करवाया है। अजमेर जिले में सरवाड़ के तीन तथा टांटोटी और पुष्कर के एक-एक वार्ड को सर्वे में चिह्नित किया गया है। अब तक पांच लाभार्थियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सर्वे में अपात्र पाए जाने वाले परिवारों के सामने खाद्य सुरक्षा योजना से बाहर होने का संकट गहरा गया है।
70 से 80 फीसदी से ज्यादा लाभार्थी वाले वार्ड निशाने परः राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में लाभार्थियों की अधिक संख्या वाले वार्डों को प्राथमिकता से जांच के लिए चुना गया है। ऐसे वार्ड, जहां 70 से 80 फीसदी या इससे ज्यादा आबादी योजना से जुड़ी है, वहां पात्रता का सत्यापन किया जा रहा है। सर्वे के जरिए पता लगाया जाएगा कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रहा है या आर्थिक रूप से सक्षम परिवार इसका फायदा उठा रहे हैं।
अजमेर जिले में 5 वार्ड चिह्नित किए है। इनमें सर्वाधिक तीन वार्ड सरवाड़ के है। इसके अलावा टांटोटी व पुष्कर का एक-एक वार्ड शामिल है। इन क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की पात्रता की जांच की जा रही है। सर्वे में परिवारों की आर्थिक स्थिति व योजना के लिए निर्धारित पात्रता मापदंडों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
जिले में सर्वे प्रक्रिया में अब तक एक दर्जन से ज्यादा लाभार्थियों को चिन्हित किया जा चुका है। संबंधित परिवारों से उनकी पात्रता को लेकर जवाब मांगने की तैयारी है। जवाब, दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निर्णय जांच, पात्रता संबंधी तथ्यों के आधार पर होगा।
खाद्य सुरक्षा योजना में लाभार्थियों की पात्रता की जांच का दायरा अजमेर तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में ऐसे 224 वार्ड चिह्नित किए गए हैं, जहां योजना के लाभार्थियों का अनुपात अधिक है। इन वार्डों में सर्वे से वास्तविक पात्र परिवार और निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतरने वाले लाभार्थियों की पहचान की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में जांच के दौरान वास्तविक पात्र परिवारों का लाभ प्रभावित नहीं हो, यह भी बड़ी चुनौती रहेगी। सर्वे में परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और पात्रता का सही आकलन जरूरी होगा, ताकि अपात्र लाभार्थियों की पहचान के साथ जरूरतमंदों का निवाला भी सुरक्षित रह सके।
जिले में पांच वार्ड में प्रवर्तन अधिकारी व निरीक्षकों के जरिए सर्वे किया जा रहा था। अपात्रों को चिह्नित कर पांच को नोटिस दिए है। अपात्रों को नोटिस के जरिए सरेंडर का अवसर दिया गया है।
-नीरज जैन, जिला रसद अधिकारी (द्वितीय)
Updated on:
30 Oct 2026, 9:16 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 9:16 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.