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अजमेर दरगाह के घनी आबादी वाले इलाके में AI कैमरों की जरूरत, त्रिपोलिया गेट के आगे CCTV नहीं

अजमेर के दरगाह और घने इलाकों में सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए एआई और सीसीटीवी कैमरों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है, जिससे अवैध गतिविधियों और अपराधों पर रोक लग सके।
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अजमेर

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Arvind Rao

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रक्तिम तिवारी

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Updated: 26 Oct 2026, 2:56 PM IST

ajmer dargah ai surveillance

AI का करें इस्तेमाल तो दरगाह के घने इलाके में सर्विलांस हो बेहतर (पत्रिका फाइल फोटो)

-रक्तिम तिवारी

Ajmer Dargah AI Surveillance: अजमेर: अढ़ाई दिन का झोपड़ा, तारागढ़ संपर्क सड़क और इसके आसपास के इलाके को अभय कमांड सेंटर से जोड़ने की जरूरत है। दरगाह संपर्क सड़क पर स्थायी पुलिस चौकी बन चुकी है। तीसरी आंख की निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से यहां चोरी-छिपे मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध वस्तुओं की खरीद-फरोख्त और अन्य गतिविधियों पर रोक लग सकेगी।

शहर में हत्या, लूट, मारपीट और दुर्घटना सहित अन्य वारदातों पर नजर रखने के लिए कलक्ट्रेट स्थित राजीव गांधी भवन में अभय कमांड सेंटर बनाया गया है। शहर में 3 हजार से ज्यादा कैमरे कमांड सेंटर से जोड़े गए हैं। पुलिसकर्मी एलईडी स्क्रीन पर शहर के अंदरूनी और आसपास के इलाकों में कैमरों के जरिए प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखते हैं।

यह हैं शहर के सघन इलाके

अजमेर में अढ़ाई दिन का झोपड़ा, तारागढ़ संपर्क सड़क, जालियान कब्रिस्तान, आमाबाव सहित नागफणी शहर के सघन इलाकों में शामिल हैं। बीते 30 साल में अरावली पर्वत पर अवैध मकान और झुग्गी-झोंपड़ियां बनाकर बड़े पैमाने पर कब्जे हुए हैं। पिछले साल वन विभाग और प्रशासन ने बड़े पीर की दरगाह, मीठा नीम और तारागढ़ के निकट 213 दुकानें और झोपड़ियां हटाई थीं।

अभी नहीं है हाईटेक निगरानी

दरगाह के त्रिपोलिया गेट तक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। घने इलाके अभय कमांड सेंटर के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से दूर हैं। यहां हाईटेक निगरानी सिस्टम नहीं है। अवैध जुआ-सट्टा, मादक पदार्थों की तस्करी, जड़ी-बूटियों, नगीने सहित अन्य गतिविधियां जारी हैं।

एआई का करें इस्तेमाल, तो ये होंगे फायदे

  • एआई कैमरों की मदद से रियल टाइम ट्रैफिक डायवर्जन में आसानी होगी। जाम की स्थिति बनने पर वाहनों को डायवर्ट करने के संकेत मिल सकेंगे।
  • भीड़ का विश्लेषण कर एआई जिला और पुलिस प्रशासन को पहले से अलर्ट कर सकता है।
  • एआई-आधारित सेंसर के जरिए पर्यटकों को मोबाइल ऐप पर पार्किंग की उपलब्धता की जानकारी मिल सकती है।
  • एआई सेंसर खतरनाक मोड़ पर वाहनों को ट्रैक कर चेतावनी दे सकते हैं।
  • एआई सेंसर से पहाड़ी पर भूस्खलन, कटाव और अन्य गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
  • एआई इमेज प्रोसेसिंग और सेंसर के जरिए सड़कों और इमारतों में दरारों की पहचान की जा सकती है।
  • ऑगमेंटेड रियलिटी की मदद से सदियों पुरानी इमारतों को देखना आसान हो सकता है।


ये रही फैक्ट फाइल

  • 3 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे हैं शहर में।
  • 100 सीसीटीवी कैमरे हैं दरगाह इलाके में।
  • 01 भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है तारागढ़ संपर्क सड़क क्षेत्र में।
  • 1.50 लाख तक है क्षेत्र की अनुमानित आबादी।

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