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अजमेर JLN अस्पताल की बदइंतजामी: 6 वार्डबॉय तैनात फिर भी इमरजेंसी में मरीज स्ट्रेचर पर करता रहा इंतजार, परिजन होते रहे परेशान

Ajmer Hospital Mismanagement: अजमेर के JLN अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मरीज को सीटी स्कैन के लिए ले जाने में देरी हुई। छह वार्डबॉय तैनात होने के बावजूद मरीज को स्ट्रेचर पर इंतजार करना पड़ा।
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अजमेर

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Harshita Saini

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Updated: 27 Oct 2026, 11:17 AM IST

Ajmer Hospital Mismanagement

Ai Generated Image

अजमेर. जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की आपातकालीन इकाई में गंभीर मरीजों को भी समय पर मदद नहीं मिल रही। यहां मरीजों को जांच के लिए ले जाने के बजाय वार्डबॉय से स्टोर में सामान की ढुलाई करवाई जा रही है। जबकि गंभीर मरीजों को सीटी स्कैन और एक्स-रे आदि के लिए वार्डबॉय का इंतजार करना पड़ रहा है।

परेशान होते रहे परिजन

सोमवार सुबह किशनगढ़ में सड़क दुर्घटना में गम्भीर घायल होकर पहुंचे मरीज बुद्धिप्रकाश के परिजन वार्डबॉय के लिए करीब 15 मिनट तक परेशान होते रहे। मुख्यद्वार पर तैनात वार्डबॉय कभी दूसरे कर्मचारी के आने तो कभी पांच मिनट ठहरने की बात कहकर टालता रहा। अस्पताल के उपअधीक्षक डॉ. अमित यादव के दखल के बाद महिला कर्मचारी के साथ घायल को सीटी स्कैन के लिए भेजा जा सका।

गंभीर हालत बताई, फिर भी इंतजार की सलाह…

जेएलएनएच की आपातकालीन इकाई में लाए गए मरीज को सीटी स्कैन करवाने ले जाना था। परिजन ने आपातकालीन इकाई के गेट पर मौजूद वार्डबॉय से कहा तो उसने दूसरे वार्डबॉय के आने की बात कहकर इंतजार करने को कहा। काफी देर तक कोई नहीं पहुंचा। परिजन ने दोबारा मरीज की गंभीर स्थिति बताई तो फिर से 5 मिनट रुकने का जवाब मिला। इस टालमटोल में करीब 15 मिनट से ज्यादा समय गुजर गया।

छह वार्डबॉय, मरीज के लिए कोई नहीं

पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि आपातकालीन इकाई में छह वार्डबॉय तैनात थे। सोमवार को दो वार्डबॉय स्टोर में सामान ढुलाई में लगे होना सामने आया। आपातकालीन इकाई में वार्डबॉय नहीं मिलने पर मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर खींच रहे है। चतुर्थ श्रेणी नहीं ले जाते मरीज पत्रिका पड़ताल में आया कि हाल ही अस्पताल में 120 नए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तैनाती होन से पूर्व में कार्यरत 120 वार्डबॉय को हटाया गया है। एजेन्सी के 250 वार्डबॉय के साथ कुछेक नए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तैनात करने के बावजूद नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ट्रोलीमैन और वार्ड में काम नहीं कर रहे।

इनका कहना है…

आपातकालीन इकाई में छह वार्डबॉय तैनात रहते हैं। दो मुख्यद्वार से आपातकालीन इकाई तक मरीजों को लाने-ले जाने के लिए हैं। शेष चार को एक्स-रे, सीटी स्कैन अन्य जांच व वार्ड में छोड़ने के लिए रखा है। मैटर्न उनसे स्टोर से सामान मंगवाने का काम कराते हैं जिससे कभी-कभार व्यवस्था बिगड जाती है। स्टोर की व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।
- डॉ. अमित यादव, उप अधीक्षक जेएलएनएच

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