
अजमेर.
ट्रेन में सफर करने के दौरान महिला यात्री के पर्स से रुपए चुराना एक युवक को भारी पड़ा। वह दोस्त के साथ रेलवे गु्रप डी की परीक्षा देने दिल्ली जा रहा था लेकिन चोरी के आरोप में दोनों हवालात पहुंच गए। राजकीय रेलवे पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया। उन्हें अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
पुलिस के अनुसार उदयपुर के प्रताप नगर और बापू बाजार निवासी दो युवक सुबह चेतक एक्सप्रेस से दिल्ली रेलवे की ग्रुप डी की परीक्षा देने जा रहे थे। रिजर्वेशन कोच में सफर करने के दौरान एक युवक की नजर ऊपर वाली सीट पर बैठी महिला यात्री के पर्स पर पड़ी।
नीयत डोलने पर युवक ने पर्स में रखे 2500 रुपए निकाल लिए। अजमेर पहुंचने से पहले महिला यात्री ने जीआरपी थाने में शिकायत कर दी। पुलिस प्रकरण की पड़ताल में जुटी तो महिला यात्री के साथ सफर कर रहे दोनों युवक से सम्पर्क साधा।
मामला पुलिस तक पहुंचने पर रकम निकालने वाले युवक ने अजमेर पहुंचने पर महिला को रकम लौटा दी लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने आरोपित युवक व उसके दोस्त को चोरी के मामले में गिरफ्तार कर लिया।
दोस्त को भी गलती की सजा
जीआरपी की गिरफ्त में आए युवक ने बताया कि उसको पता नहीं था कि उसकी छोटी सी भूल इतनी भारी पड़ेगी। उसने बताया कि वह पुलिस के बुलावे पर स्वयं अजमेर आया और रकम लौटा दी। उसकी गलती के कारण दोस्त को हवालात देखनी पड़ गई। अब अपनी गलती पर पछतावा हो रहा है लेकिन इस गलती से सबक मिल गया।
महिला यात्री की शिकायत पर चोरी का मुकदमा दर्ज किया था। पड़ताल में सहयात्री युवकों की लिप्तता सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया। अदालत ने दोनों को जेल भेज दिया।
-महेशचन्द जोशी, उप निरीक्षक जीआरपी थाना अजमेर
नौकरी के लिए भतीजे की भी नहीं की सिफारिश
राजनीति में नैतिकता की पराकाष्ठा। वो भी क्या जमाना था जब राजनीति में कोई आडम्बर पाखंड नहीं था। बस केवल सहज सेवा भाव था। वह भी उच्च नैतिक मूल्यों के साथ। हम बात कर रहे हैं 1952 के आम चुनाव की।
आम चुनाव के बाद एकीकृत हुआ प्रदेश संयुक्त राजस्थान कहलाता था। कुछ रियासतें उस समय भी बरकरार थीं। 1952 में पहलेआम चुनाव में जय नारायण व्यास मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे और वह जोधपुर व जालौर से चुनाव हार गए। बाद में किशनगढ़ से उपचुनाव में जीते। 18 अप्रेल 1948 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राजस्थान का उद्घाटन उदयपुर में किया। मेवाड़ के महाराणा भोपाल सिंह को राज प्रमुख बनाया गया और माणिक्य लाल वर्मा संयुक्त राजस्थान के मुख्यिा बने।