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#World Tourism Day 2018 : परदेसियों से ज्यादा अजमेर-पुष्कर आए देशी पावणे

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world tourism day 2018

world tourism day 2018

अजमेर.

अपनी पारम्परिक विरासत, संस्कृति, सर्वपंथ समभाव जैसे गुणों को सहेजने के साथ-साथ अजमेर और पुष्कर देश के पर्यटन मानचित्र में खास पहचान रखते हैं। एक तरह सूफियत की महक और दूसरी ओर तीर्थनगरी पुष्कर सनातन संस्कृति का संदेश देती है।

यही वो डोर है, जिससे यह समूचा अजमेर जिला देश-दुनिया में अनूठा समझा जाता है। देशी-विदेशी पावणों को यहां के रीति-रिवाज और परम्पराएं, लजीज खान-पान एवं प्राकृतिक दृश्यों, किलों-महलों ने हमेशा आकर्षित किया है।

परम्पराओं के बीच हाइटेक और आधुनिक संस्कृति का समावेश हुआ है। थोड़ा सा प्रयास और किया जाए तो अजमेर जिला पर्यटन का सिरमौर बन सकता है।

देशी पावणे आए ज्यादा

साल 2018 की शुरुआत से अजमेर और पुष्कर में सैलानियों की आवाजाही जारी है। इस साल 21 अगस्त तक अजमेर में 25 लाख 27 हजार 800 और पुष्कर में 30 लाख 93 हजार 200 देशी पावणे आए। जबकि विदेशी सैलानियों की संख्या अजमेर में 63,370 और पुष्कर में 33,965 रही। वैसे साल 2016 में अजमेर में सर्वाधिक 48 लाख 96 हजार 070 देशी और 2008 में पुष्कर में सर्वाधिक 86 हजार 030 विदेशी पर्यटक आए थे। इसके अलावा देशी-विदेशी पर्यटकों में उतार-चढ़ाव बराबर चल रहा है।

देखिए ये शानदार नजारे....

पर्यटन विभाग के उप निदेशक संजय जौहरी ने बताया कि अजमेर पर्यटन क्षेत्र में किसी से कमतर नहीं है। कभी उपेक्षित और बदहाल रााजकीय संग्रहालय का नजारा बिल्कुल बदल चुका है। संग्रहालय की दर्शक दीर्घाओं में पुरा सम्पदा-सामग्री को अत्याधुनिक ढंग से सजाया गया है। बरसों बाद सम्राट पृथ्वीराज चौहान, मुगल सम्राट अकबर, जहांगीर, राजा मानसिंह की मूर्तियां लगाई गई है। इसके अलावा आनासागर झील की मुगलकालीन बारादरी, नए कलेवर में बना सुभाष उद्यान, महाराणा प्रताप स्मारक, आनासागर चौपाटी सैलानियों को लुभा रहे हैं।

जल्द चलेंगी फ्लाइट्स

शहरवासियों की बरसों पुरानी एयरपोर्ट की मांग पूरी हो चुकी है। आगामी अक्टूबर से दिल्ली-किशनगढ़ के बीच नियमित फ्लाइट चलेंगी। देशी-विदेशी पर्यटकों, आम लोगों को अजमेर-पुष्कर और अन्य इलाकों तक आवाजाही में आसानी होगी। जल्द लोग यहां से देश-दुनिया के विभिन्न शहरों के लिए फ्लाइट पकड़ सकेंगे।

दीवारों पर सतरंगी चित्रकारी

कई सरकारी-निजी दफ्तरों, भवनों की दीवारों का रंग-रूप बदल चुका है।छोटों-बडों, बुजुर्गों कलाकारों और अफसरों ने कलम और कूची उठाकर दीवारों को कैनवास बना दिया। नयनाभिराम पेंटिग्स ने शहर को सतरंगी बना दिया है। जिले के किशनगढ़, पुष्कर, ब्यावर और अन्य क्षेत्रों में ऐसे प्रयास शुरू किए गए हैं। यह सैलानियों को काफी पसंद आए हैं।

अरावली का सौंदर्य है आनासागर

आनसागर झील वास्तव में अरावली का सौंदर्य है। यहां के नयानिभराम नजारे देशी-विदेशी सैलानियों को जादुई मोहपाश में बांध लेते हैं। गौरव पथ पर बहुत सुंदर चौपाटी बनाई गई है। हैंगिंग ब्रिज भी झील में चार-चांद लगाता दिखता है। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के समक्ष बनी चौपाटी भी सैर-सपाटे का स्थल बन चुकी है। ब्रिटिशकालीन सर्किट हाउस, बजरंगढ़ की पहाड़ी से शहर की अप्रतिम सुंदरता दिखाई देती है।