अजमेर

यह कॉलेज बढ़ा रहे सरकार का सिरदर्द, सीएम ले सकती हैं यह तगड़ा एक्शन

सरकार प्रस्ताव पर विचार कर रही है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने चारों कॉलेज से जानकारियां मांगी है।
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Oct 26, 2017
govt soon undertaken engineering colleges
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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

बॉयज और महिला इंजीनियरिंग कॉलेज सहित प्रदेश के दो अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है। यह कॉलेज फिलहाल स्वायत्तशासी समितियों के अधीन संचालित हैं। कॉलेज में कथित अनियमितताओं, वित्तीय समस्याओं को देखते हुए सरकार प्रस्ताव पर विचार कर रही है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने चारों कॉलेज से जानकारियां मांगी है।

अजमेर के बॉयज और महिला सहित झालवाड़ और बारां इंजीनियरिंग कॉलेज राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। विद्यार्थियों की सेमेस्टर और प्रयोगिक परीक्षाएं, पेपर और पाठ्यक्रम निर्माण तकनीकी विश्वविद्यालय करता है। इन कॉलेजों में परीक्षाएं, परिणाम निकालने और प्रवेश कार्यों में विलम्ब से सरकार और विद्यार्थी परेशान हैं।

दस महीने पहले उच्च और तकनीकी शिक्षाविदों ने सीएमओ को प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने इन कॉलेज को सरकारी नियंत्रण में लेने और विभिन्न विश्वविद्यालयों का संगठक कॉलेज बनाने की सिफारिश की। लेकिन प्रस्ताव अटका हुआ है। पत्रिका ने इसको लेकर 15 अक्टूबर को 'नहीं बन पा रहे संगठन कॉलेज, प्रस्ताव पर छाई धुंध शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की।

प्राचार्यों को पत्र जारी

तकनीकी शिक्षा विभाग ने अजमेर के बॉयज और महिला, झालावाड़ और बारां इंजीनियरिंग कॉलेज को सरकारी नियंत्रण में लेने की योजनान्तर्गत जानकारी मांगी है। विभाग के संयुक्त सचिव ने प्राचार्यों को पत्र जारी किया है। इसमें कॉलेज में कार्यरत शैक्षिक और अशैक्षिक कार्मिकों का वेतनभार, एक्रिडिटेशन के लिए 80 प्रतिशत पदों की स्थिति, न्यूनतम वित्तीय भार, विद्यार्थियों की फीस से होने वाली आय, स्वायत्तशासी समिति द्वारा लगाए गए कार्मिकों की स्थिति और अन्य सूचनाएं भेजने को कहा है।

यूं बच रहे थे कॉलेज

अजमेर के बॉयज एवं महिला इंजीनियरिंग, झालावाड़, भरतपुर, बांसवाड़ा, बीकानेर और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज पृथक-पृथक स्वायत्तशासी सोसायटी के अधीन संचालित हैं। सरकार और सोसायटी के नियम पृथक हैं। इनमें मनमाने ढंग से नियुक्तियां, पदोन्नतियां, लाखों रुपए की खरीद-फरोख्त की शिकायतें मिलती रही हैं। महंगी कार, पसंदीदा किराए का मकान लेने, टेक्यूप में करोड़ों रुपए का बजट, विदेश यात्रा जैसी सुविधाएं मिलने से कई कॉलेज इसमें दखल नहीं चाहते हैं।

Published on:
26 Oct 2017 07:44 am