अजमेर

धन्नो के लिए वीरू जा चढ़ा टंकी पर, आखिर पहुंचना ही पड़ा मौसी को

प्रशासनिक कैम्प के पास स्थित 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए तथा पाबंदी नहीं हटाने पर कूदने की धमकी दे डाली।
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Updated: 26 Oct 2017, 7:58 AM IST
person lift on overhead-water-tank
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पुष्कर (अजमेर)।

पशु मेले में अश्ववंश की आवक पाबंदी के पशुपालन विभाग के एक तरफा निर्णय को लेकर पशुपालकों में रोष चरम सीमा पर पहुंचने लगा है। इसको लेकर दो पशुपालकों ने वीरूगीरी अपनाई। दोनों पशुपालक मेला मैदान में प्रशासनिक कैम्प के पास स्थित 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए तथा पाबंदी नहीं हटाने पर कूदने की धमकी दे डाली।

उनकी वीरूगीरी से पूरे पुष्कर और अजमेर में हड़कम्प मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस व सिविल डिफेंस की टीम पहुंच गई। खासी समझाइश और जिला कलक्टर को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के बाद पशुपालक टंकी से उतरे तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।

अजमेर जिले के पाटन गांव में एक घोड़े में ग्लैंडर नामक बीमारी का पता चलने पर सरकार ने पुष्कर पशु मेले में अश्ववंश की आवक व खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। उसके बाद से अश्वपालकों और पशुपालन विभाग के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विरोध बढऩे के साथ ही दो पशुपालक मेला मैदान में प्रशासनिक केम्प के पास स्थित करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए।

उन्होंने अश्ववंश पर पाबंदी खत्म नहीं करने पर कूदने की धमकी दे डाली। पता चलने पर मेला मजिस्ट्रेट विष्णु गोयल, तहसीलदार विमलेन्द्र राणा, थानाप्रभारी महावीर शर्मा सहित सविल डिफेन्स की टीम मौके पर बुला ली गई। लेकिन युवक नीचे नहीं उतरे। कई घंटों की मशक्कत के बाद पशुपालकों की समझाइश और वार्ता की गई। मेला मजिस्ट्रेट विष्णु गोयल ने जिला कलक्टर को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी। तब जाकर दोनों पशुपालक टंकी से नीचे उतरे।

पहले कराओ टेस्ट, फिर आने दो

अश्वपालक शक्ति सिंह पीपरोली ने जिला प्रशासन की घोड़ों में फैल रहे ग्लैंडर्स रोग की दलीलों का प्रत्युत्तर दिया। उन्होंने कहा कि बीमारी से देश के सभी घोड़े ग्रसित नहीं है। यदि ऐसा है तो जिला प्रशासन को पुष्कर क्षेत्र की सीमा पर मेडिकल कैंप लगाकर घोड़ों की जांच करनी चाहिए। स्वस्थ घोड़ों को मेले में लाने की मंजूरी देनी चाहिए। लेकिन प्रशासन ने ऐसी किसी दलील को नहीं माना है।

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