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अजमेर. एक ओर परिवहन विभाग के राजस्व के टारगेट पूरे नहीं हो रहे है। वहीं जगह-जगह खुले कार बाजारों से विभाग को राजस्व की हानि हो रही है। हालांकि विभाग के पास जांच के लिए डीटीओ और निरीक्षकों की टीम है। लेकिन उनका इस ओर ध्यान नहीं है।
अपना चौपहिया वाहन बेच देते
बीते कुछ सालों में पुरानी चार पहिया वाहनों की बिक्री बढऩे के साथ जगह-जगह कार बाजार खुले। इन बाजारों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से गाडिय़ां बिकने आती हैं और लम्बे समय तक खड़ी रहती हैं। केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार अपने वाहन का बेचान करने वाले व्यक्ति को बेचान के 14 दिन में वाहन को जिस व्यक्ति को वाहन बेचा है उसके नाम कराना होता है। लेकिन लोग विक्रय पत्र पर हस्ताक्षर करके अपना चौपहिया वाहन बेच देते हैं। अधिकतर वाहन क्रय करने वाले व्यापारी के यहां 14 दिन से ज्यादा समय तक खड़े रहते हैं। इनका क्रेता के नाम रजिस्ट्रेशन नहीं होता है। इसके चलते परिवहन विभाग को राजस्व की हानि होती है।
राजस्व की दोहरी हानि
यदि वाहन का समय पर रजिस्ट्रेशन हो तो परिवहन विभाग को उसके टैक्स का 25 प्रतिशत राजस्व के रूप में प्राप्त हो। इसी तरह गाड़ी को स्थानांतरित कराने पर भी विभाग को फीस का प्राप्त होगी। लेकिन यह दोनो ही कार्य समय अनुसार नहीं किए जाते। विभाग को दोहरी राजस्व हानि हो रही है।
नहीं ले रखा है प्रमाण-पत्र
जो व्यक्ति वाहनों के क्रय विक्रय का व्यापार करता है उसे परिवहन विभाग से ट्रेड सर्टिफिकेट लेना होता है। नए वाहनों का विक्रय करने वाले व्यापारी तो विभाग से यह प्रमाण-पत्र लेते हैं। लेकिन पुराने वाहनों का व्यापार करने वाले व्यापारी आम तौर पर यह प्रमाण पत्र नहीं लेते है। इसलिए इन पर विभाग की लगाम नहीं है।
पत्रिका अलर्ट
यदि आप वाहन बेच रहे है तो 14 दिन में उस वाहन का रजिस्ट्रेशन जिसे वाहन बेचा है उसके नाम करा दें। अन्यथा आप पर मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन के चलते 5 हजार रुपए का जुर्माना लगा सकता है। स्थानांतरण के बाद ही उस वाहन की जिम्मेदारी क्रेता के नाम होती है। यदि उस वाहन से कोई दुर्घटना हो जाए तो उसके पूर्व मालिक पर ही शिकंजा कसेगा।