
अजमेर. दस बारह साल पहले तक गर्मी की छुट्टियों में लोगों का रुझान हिल स्टेशन की तरफ होता था। शिमला, मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेष, लोनावला, माउन्ट आबू, शिलॉन्ग, दार्जलिंग जैसे हिल स्टेशन पर पर्यटकों की सर्वाधिक आवाजाही होती थी। लेकिन पर्यटन ट्रेंड में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है।
केदारनाथ-बद्रीनाथ सर्किट
चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री आते हैं। जबकि बड़ी चार धाम की यात्रा में द्वारका, रामेश्वरम, केदारनाथ और पुरी आते हैं। बीते 5-6 साल में अजमेरवासियों का रुझान गर्मी की छुट्टियों में केदारनाथ-बद्रीनाथ सर्किट में बढ़ा है। 25 से 35 प्रतिशत लोग छुट्टियों में सैर-सपाटे के लिए धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं।
25 हजार लोग जाते अमरनाथ
अजमेर और जिले के ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, केकड़ी, पुष्कर और अन्य इलाकों से प्रतिवर्ष 25 हजार से ज्यादा लोग अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। बर्फानी बाबा के दर्शन के लिए लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए प्राइवेट ट्रेवल्स बस, ट्रेन और हवाई यात्रा उपलब्ध है।
यह हैं धार्मिक पर्यटन के कारण
-छह महीने ही खुलते हैं केदारनाथ-बद्रीनाथ के कपाट
-हिमालय की चोटियों पर जमी रहती है बर्फ
-चारधाम यात्रा का बना है पूरा सर्किट
अमरनाथ यात्रा है काफी दुर्गम
हिल स्टेशन पर धार्मिक यात्रा के साथ पैदल और पहाड़ों-प्रकृति का अनुभव लेने के लिए लोग अमरनाथ यात्रा जाते हैं। यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। अजमेर से कई लोग तो हर साल अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। जुलाई-अगस्त के दौरान अमरनाथ जाने वाले यात्रियों की तादाद ज्यादा रहती है।
क्या-क्या रखें ध्यान
-हिल स्टेशन पर ठहरने के लिए होटल-धर्मशाला
-सुविधानुसार बस, ट्रेन, एयर टिकट की बुकिंग
-निजी वाहन अथवा टैक्सी की व्यवस्था
-धार्मिक पर्यटन से जुड़ी जानकारी
-मौसम अनुकूल गर्म कपड़े, आवश्यक दवाएं
इनका कहना है
हिल स्टेशन के साथ धार्मिक पर्यटन में पिछले दस साल में 35 से 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। बेहतर कनेक्टिविटी, ठहरने की सुविधाएं, दर्शन के अलावा पहाड़ों-प्रकृति के बीच रहने की इच्छा पूरी होती है।
प्रो. शिवप्रसाद, पर्यटन विशेषज्ञ और विभागाध्यक्ष काॅमर्स-मैनेजमेंट, मदस विवि.