
नगरपरिषद चुनाव: वार्डाें में सक्रिय दिख रहे संभावित उम्मीदवार
गंगापुरसिटी. नगर निकाय चुनाव की आहट के साथ ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों ने वार्डों में सक्रियता बढ़ा दी है। कोई मतदाताओं की नब्ज टटोलने में जुटा है तो कोई स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधकर अपनी दावेदारी मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। चौपालों, सामाजिक कार्यक्रमों और वार्ड स्तरीय बैठकों में संभावित उम्मीदवारों की मौजूदगी भी बढ़ गई है। वहीं राजनीतिक दल भी टिकट वितरण से पहले नए और पुराने चेहरों की सक्रियता पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
पूर्व पार्षद अपने परंपरागत वार्डों में पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नए चेहरे ऐसे वार्डों की तलाश में हैं जहां जीत की संभावना अधिक हो। कई दावेदारों ने दो से तीन वार्डों में अपनी सक्रियता बढ़ा रखी है, ताकि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद उपयुक्त वार्ड से चुनाव मैदान में उतर सकें। राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय सूत्रों से संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता और जनाधार का फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया है।
अगस्त में लॉटरी पर टिकी निगाहें
चुनावी तैयारियों के बीच सबसे अधिक इंतजार वार्डों के आरक्षण की लॉटरी का है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अगस्त के मध्य तक लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने का हलफनामा दिया है। इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी प्रतिनिधित्व मिलने से चुनावी समीकरण बदलने की संभावना है। यही कारण है कि कई पुराने और नए दावेदार अंतिम निर्णय लेने से पहले लॉटरी का इंतजार कर रहे हैं। सभापति पद के संभावित दावेदार भी ऐसे वार्डों की तलाश में हैं, जहां से उनकी जीत की संभावना अधिक हो। पिछले चुनावों में कई बड़े दावेदार वार्ड चुनाव हारने के कारण सभापति की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।
जनता के कामों में फिर बढ़ी रुचि
चुनावी माहौल बनते ही कई पूर्व पार्षद फिर से वार्डों में सक्रिय नजर आने लगे हैं। वे लोगों के छोटे-बड़े कार्यों को प्राथमिकता से कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए अपने लेटरहेड के माध्यम से अधिकारियों को पत्र लिखने के साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। सड़क, पेयजल, सीवर लाइन, गड्ढों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष रुचि दिखाई जा रही है।
हालांकि नगरपरिषद बजट की कमी का हवाला देकर अधिकांश कार्य सीमित संसाधनों में करा रही है, लेकिन चुनावी माहौल के चलते जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ने लगी है। अब वार्डों की लॉटरी और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ शहर की सियासी हलचल और तेज होने की संभावना है।