
अजमेर/ब्यावर/किशनगढ़।
गर्मी के दिनों में पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने के लिए मिट्टी से बनी मटकी की होड़ किसी से नहीं की जा सकती। हालांकि 'गरीबों का फ्रिजÓ कहलाने वाली ये मटकियां अब महंगी हो गई है। यह मिट्टी और ईंधन के भाव बढऩे का असर है। इस महंगाई का असर लोटा, हांडी ढकणी, पालसिए जैसे उत्पादों पर भी पड़ा है।
सेंदड़ा रोड पर इस व्यवसाय से जुड़े राहुल प्रजापति ने बताया कि मिट्टी से बने उत्पादों के भावों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। मिट्टी, मजदूरी, लकड़ी, गोबर के उपलों का बुरादा के भावों में हुई बढ़ोतरी का असर मिट्टी से बने बर्तनों पर पड़ा है। इससे खरीद पर असर पड़ रहा है। बाजार में ये मटकियां 80 से लेकर 130 रुपए प्रति नग के हिसाब से बिक रही हैं।
वहीं छोटी मटकियां 60 से 90 रुपए प्रति नग बिक रही हैं। मिट्टी से बने बर्तनों के भावों में गत वर्ष की तुलना में इस बार करीब 15 फीसदी तक वृद्धि हुई है। भाव बढऩे का असर बड़े आकार की मटकियों की खरीद पर पड़ रहा है। लोग छोटे आकार और सीमित संख्या में ही मटकियां खरीदने को तवज्जो दे रहे हैं।
मशहूर हैं अजमेर की मटकियां
अजमेर की मटकियां पूरे राजस्थान और देश के कई हिस्सों में मशहूर हैं। यहां काली-लाल मिट्टी को पकाकर विशेष रूप से गोल मटकियां बनाई जाती हैं। इस पर लाल गेरू का रंग करने के बाद चूने से अल्पना-रंगोली बनाई जाती है। यह मटकियां और बड़े मटके अब लोगों की पहुंच से दूर हो रहे हैं। अजमेर में भी मटकियां 70 से 100 रुपए तक बेची जा रही हैं। जबकि यह गरीबों-मध्यम वर्ग के लोगों का सबसे सस्ता फ्रिज कहा जाता रहा है।
फ्रिज-वाटर कूलर का पानी हानिकारक
डॉक्टर्स की मानें तो फ्रिट और वाटर कूलर का ठंडा पानी सेहत के लिए हानिकारक है। अत्यधिक ठंडा पानी पीने से गला खराब होने, जुखाम होने की संभावना ज्यादा रहती है। ठंडा पानी बीमारियों का घर होता है। जबकि मटकियों का पानी शीतल और स्वच्छ होता है। मिट्टी की बनी मटकियों में छोटे-छोटे छिद्रों से पानी ठंडा होता है। यह बिल्कुल शरीर के तापमान के समान होता है। मटकी का पानी पीने के बाद व्यक्ति बीमार नहीं होता है