छात्रा ने उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति मांगी तो हुआ खुलासा, गणित की कॉपी में पहले पेज पर प्रश्नवार अंकों का अंकन ही नहीं
ब्यावर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इस साल हुई परीक्षा में उत्तर पुस्तिका जांच में लापरवाही का मामला सामने आया है। एक छात्रा ने दसवीं की गणित व सामाजिक विषय की उतर पुस्तिकाओं का पूनर्मूल्यांकन करवाया। इसमें गणित विषय में उत्तरपुस्तिका के पहले पेज पर प्रश्नवार मिले अंकों को ही नहीं चढाया गया। छात्रा को पहले 39 अंक ही मिले, जबकि पूनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढकर 74 हो गए। यह नम्बर का अंतराल व प्रथम पेज पर प्राप्त अंकों का अंकन नहीं करना खामी को दर्शाता है।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नया गांव लूलवा से सोनम ने दसवीं बोर्ड की परीक्षा दी। परीक्षा में उसके गणित विषय 100 में से 39 अंक आए, जबकि उसे अधिक अंक की उम्मीद थी। ऐसे में उसने उत्तर पुस्तिका के पूनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर दिया। उसे तीन दिन पहले पूनर्मूल्यांकन का परिणाम मेल पर मिला। इसमें सोनम के गणित विषय में अंक बढकर 74 हो गए।
इस ई-मेल पर उत्तर पुस्तिका की प्रति भी डाली गई। इसमें उत्तर की जांच कर अंक तो दिए गए हैं, लेकिन उत्तर पुस्तिका के प्रथम पेज पर प्रश्नवार जो अंक मिले उसका अंकन ही नहीं दर्शाया गया है। प्रथम पेज पर परीक्षक के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। सोनम ने सामाजिक विज्ञान की उत्तर पुस्तिका का भी पूनर्मूल्यांकन करवाया। इसमें उत्तर पुस्तिका के प्रथम पेज पर प्रश्नवार अंक मिले। इसका अंकन किया गया है।
पूनर्मूल्यांकन में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से उपलब्ध करवाई गई उत्तर पुस्तिका की प्रति में लापरवाही सामने आई है, जिसमें परीक्षक ने बिना नम्बर चढ़ाए ही सीधे ऑनलाइन नम्बर चढ़ा दिए। इसमें भी बालिका को प्राप्त सारे अंक नहीं जोड़े गए।
सोनम ने पुर्नमूल्यांकन के साथ ही अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति भी मांगी। यह बोर्ड की ओर से उसे उपलब्ध करवाई गई। इसमें गणित में प्रथम पेज पर मिले अंकों का अंकन ही नहीं किया गया, जबकि सामाजिक विज्ञान की मिली प्रति में प्रथम पेज पर मिले अंकों का अंकन हो रखा है।
छात्रा सोनम के मामा हाकम ने कहा कि यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड है। इससे ऐसा लगता है कि उत्तर पुस्तिका का सही आंकलन किए बिना ही परीक्षक ने ऑनलाइन आईडी से नम्बर चढा दिए, जबकि उत्तरपुस्तिका के प्रथम पेज पर प्रश्नवार अंक विवरण में अंकों का इन्द्राज ही नहीं किया गया है। लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
पुनर्मूल्यांकन में यदि 21 अंक से अधिक का अंतर आता है तो वीक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग के निदेशक को कठोर कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। कम अंको के अंतर पर नियमानुसार जुर्माने व अन्य शास्तियों के प्रावधान हैं। उक्त प्रकरण में इतना अंतर आया है तो नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कैलाशचंद शर्मा, सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर