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रेत में संवेदनाओं की सजीव तस्वीरें रच रहे अजय

सेंड आर्ट कला से पुष्कर क्षेत्र को दिलाई नई पहचान, कलाकृतियों में झलकते हैं सामाजिक संदेश, संस्कृति और प्रकृति के विविध रंग

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अजमेर

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दिनेश कुमार शर्मा

Apr 05, 2026

ajmer

अजय सिंह रावत

दिनेश कुमार शर्मा

अजमेर (Ajmer news) . अजमेर. पुष्कर क्षेत्र के समीपवर्ती ग्राम गनाहेड़ा निवासी सेंड आर्ट कलाकार अजय सिंह रावत अपनी अनूठी कला से रेत को जीवंत अभिव्यक्ति देने में महारत रखते हैं। उनकी उंगलियों के स्पर्श से रेत पर उभरती आकृतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। उनकी कलाकृतियों में सामाजिक संदेश, संस्कृति और प्रकृति के विविध रंग झलकते हैं। स्थानीय स्तर से शुरुआत कर उन्होंने अपनी कला के माध्यम से क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी रचनात्मकता न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, बल्कि पारंपरिक कला को नए आयाम दे रही है।

खेल-खेल में जागृत हुई रुचि

अजय ने बताया कि पुष्कर क्षेत्र में गुलाब की खेती होती है। मां जब खेत में फूल तोड़तीं तो वे खेत में रेत से कलाकृति बनाने में मशगूल रहते। जहां अन्य बच्चे खेल-खेल में मिट्टी को बिखेर देते, वहीं अजय उसी मिट्टी और रेत से आकृतियां बनाते। धीरे-धीरे यही शौक उनकी पहचान बन गया। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने खुद ही सैंड आर्ट की बारीकियां सीखीं। निरंतर अभ्यास से यह उनकी पहचान बन चुकी है। वे अब तक 1000 से अधिक सेंड आर्ट कलाकृतियां बना चुके हैं, जिनमें वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप, लोकदेवता वीर तेजाजी, राम मंदिर, हवा महल तथा राजस्थान की कला-संस्कृति पर आधारित रचनाएं शामिल हैं। इस कला में रेत, पानी, हाथों के कौशल, लकड़ी के औजार, ब्रश आदि का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही उपयुक्त स्थान और वातावरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बड़े शहरों में बनाई कलाकृति

पुष्कर-अजमेर के साथ जयपुर सहित राजस्थान के विभिन्न शहरों तथा उड़ीसा, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मुंबई और गोवा में भी उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। राज्य सरकार से भी कला को प्रोत्साहन मिला है। हाल ही में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने उन्हें सम्मानित किया, वहीं महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन, उदयपुर द्वारा ‘महाराणा सज्जन सिंह अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया।

घंटों की मेहनत मिनटों में नष्ट

उन्होंने बताया कि तेज हवाएं, धूलभरी आंधियां, तेज धूप और बारिश सेंड आर्ट कला की प्रमुख चुनौतियां हैं, जो कई बार घंटों की मेहनत को मिनटों में नष्ट कर देती हैं। इसके बावजूद वे निरंतर इस कला को नए आयाम देने में जुटे हैं। कलाकृति निर्माण में मुख्य कार्य वे स्वयं करते हैं, हालांकि उनके स्टूडेंट्स समय-समय पर सहयोग देते हैं। उनका मानना है कि सेंड आर्ट आज के समय में उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें युवा बेहतर कॅरियर बना सकते हैं।

शिक्षा व परिवार

अजय ने स्कूली शिक्षा राजकीय माध्यमिक विद्यालय गनाहेड़ा से 10वीं तक तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पुष्कर से कक्षा 11-12वीं पास की। इसके बाद अजमेर के राजकीय महाविद्यालय से स्नातक एवं गवर्नमेंट टीटी कॉलेज से बी.एड. किया। पिता कुंदन सिंह रावत कृषक, जबकि माता फूमी देवी गृहिणी हैं। उनके दो पुत्र मयंक (8) एवं मिथान (3) हैं।