अजमेर

नहीं हुआ कोई खास काम, क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल की योजना फेल

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Sep 22, 2018
quality monitoring cell
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अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्ध बी.एड कॉलेज क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल के गठन की योजना का अता-पता नहीं है। पिछले एक साल से खास काम नहीं हुआ है। ऐसे में बीएड शिक्षण की गुणवत्ता सुधार की कवायद फेल होती दिख रही है।

बीएड शिक्षण में गुणवत्ता, नवाचार, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल का गठन करने का फैसला किया था। तत्कालीन कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने विश्वविद्यालय में क्वॉलिटी मॉनिटरिंग सेल का पुनर्गठन भी किया। शिक्षा संकाय के डीन डॉ. नगेंद्र सिंह को और डॉ. अशोक सेवानी को सदस्य सचिव बनाया गया। विश्वविद्यालय ने सभी बीएड कॉलेज को यह गठित करने के निर्देश दिए।

यह थी विवि की योजना

योजना के तहत कॉलेज की सेल का सीधा नियंत्रण कुलपति के पास होगा। कॉलेज के सेल शिक्षण गुणवत्ता, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट रिकार्ड, कक्षा में उपस्थिति, शिक्षण सामग्री के इस्तेमाल, ऑडियो-वीडियो से शिक्षण, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षकों के वेतन-भत्ते और अन्य रिकॉर्ड रखेगी। कॉलेज को पूर्व विद्यार्थियों की एल्यूमिनी भी बनानी होगी।

कितने कॉलेज ने बनाए सेल?

विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अधिकांश बीएड कॉलेज ने क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल का गठन नहीं किया। ना विश्वविद्यालय ने वेबसाइट पर सेल का कार्यक्रम ना ऑनलाइन फार्म जारी किया है। इसके अलावा सत्र 2017-18 में कॉलेज शिक्षकों के आधार कार्ड से सत्यापन की शुरुआत भी नहीं हुई है। एक साल से योजना पर कोई कामकाज नहीं हुआ है। तत्कालीन कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली ने बीएड कॉलेज की नकेल कसने के लिए सम्बद्धता शिविर जरूर लगवाए थे।

सफाई का रखें ध्यान, इधर-उधर थूक कर नहीं करें गंदगी

आप इधर-उधर थूक कर गंदगी ना फैलाएं। आप थूककर गंदगी के साथ-साथ बीमारियों को भी न्यौता देते हैं...जल्द कॉलेज और विश्वविद्यालय के नौजवान कुछ ऐसी ही सीख देते नजर आएंगे। यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपने जा रहा है। व्यर्थ थूकने से रोकथाम से जुड़ा यह अभियान देश भर में चलेगा।

सामान्यत: सार्वजनिक पार्क, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी अथवा निजी अस्पताल, गलियां- सडक़, घरों के आसपास अथवा दुकानों-भवनों के निकट लोग थूकते देखे जा सकते हैं। इनमें पान-गुटखा, सुपारी खाने वाले लोग ज्यादा होते हैं। इसके अलावा श्वास और दमा पीडि़त, जुखाम-बुखार-कफ पीडि़त रोगी भी इधर-उधर थूकते रहते हैं। पूरे देश में गंदगी और बीमारियां बढ़ाने में इनका सर्वाधिक योगदान है। कई बार रोकने-टोकने और जुर्माना लगाने के बावजूद व्यर्थ थूकने का सिलसिला कम नहीं हुआ है।

Published on:
22 Sept 2018 09:15 am